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राज्यसभा में मिली मात के बाद बोलीं मायावती- हार का सपा-बसपा के रिश्तों पर कोई असर नहीं

Sun, 25 Mar 2018 06:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
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राज्यसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी की हार के बाद मायावती ने साफ किया कि भाजपा की कोशिशें सपा-बसपा के रिश्तों पर असर नहीं डाल पाएंगी। उन्होंने कांग्रेस भी नजदीकी का संकेत दिया। अखिलेश यादव ने भी सुर मिलाते हुए कहा, अगले चुनाव के लिए सपा-बसपा एकता और मजबूत हुई है। घटनाक्रम 2019 के आमचुनाव से पहले प्रदेश में नए सियासी गठजोड़ की तरफ इशारा कर रहा है। 
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मायावती ने कहा,भाजपा को हराने के लिए बसपा और सपा नेताओं ने अच्छे विचार-विमर्श के बाद नई रणनीति पर काम किया। बसपा कार्यकर्ताओं ने गोरखपुर और फूलपुर में लगकर काम किया। इसी का नतीजा था कि सीएम योगी की परंपरागत सीट और उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य की सीट पर भाजपा की शर्मनाक हार हुई। भाजपा ने इस हार के बाद राज्यसभा चुनाव में अपनी जीत और बसपा उम्मीदवार को हराने में पूरी ताकत झोंक दी। सरकारी आतंक व भय के माहौल में कई विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की।

अखिलेश को बताया समझदार, नसीहत भी दी 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नसीहत के इतर मायावती ने अखिलेश पर ममता उड़ेली। गेस्ट हाउस कांड में उन्हें क्लीन चिट दी। मायावती ने कहा, अखिलेश कम तजुर्बेकार हैं लेकिन समझदार बहुत हैं। सहमति के मुताबिक सपा के 9 या 10 वोट मिलने थे लेकिन सात ही मिले। बसपा प्रमुख ने कहा कि अखिलेश ने इस चुनाव में थोड़ी चूक कर दी। 

यदि अखिलेश की जगह बसपा को यह जिम्मेदारी निभानी होती तो संबंध मजबूत बनाए रखने के लिए बसपा अपने प्रत्याशी को जिताने की जगह सपा प्रत्याशी को प्राथमिकता देतीं। यदि अखिलेश कुंडा के गुंडे के झूठ के मकड़जाल में न फंसते तो यह दिक्कत न होती। क्या वह, राजा भैया से अखिलेश को सतर्क रहने का सुझाव देंगी? मायावती ने कहा,अखिलेश बहुत समझदार हैं। उन्हें पता चल गया होगा कि धोखा हुआ है।
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इस जीत से भरपाई नहीं होगी

मायावती ने कहा,राज्यसभा चुनाव में जीत पर भाजपाइयों का खुशी मनाना गोरखपुर और फूलपुर की शर्मनाक हार का बदला नहीं हो सकता। उपचुनाव में आम लोगों ने वोट डाला था जबकि राज्यसभा चुनाव में खरीद-फरोख्त, सरकारी मशीनरी के आतंक से वोट पड़ा। 

सपा-बसपा गठबंधन में कांग्रेस के शामिल होने के सवाल पर कहा,कांग्रेस के सभी 7 विधायकों का वोट हमें मिला है। कहा, आरएलडी नेतृत्व के वादे के बावजूद हमें आरएलडी विधायक का वोट नहीं मिला। भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए उसने अपना वोट अवैध करा दिया। बसपा को आरएलडी के मामले में आगे सोचना पड़ेगा। उधर, भासपा के दलित विधायक कैलाश नाथ सोनकर ने उनके प्रत्याशी को वोट दिया। यदि सरकार ने उन्हें प्रताड़ित करने की कोशिश की तो बसपा उसके साथ खड़ी मिलेगी।

 
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