जानकारों की मानें तो मायावती के इस फैसले के बाद पार्टी की आगे की राह आसान नहीं है। अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद के समर्थकों को यह फैसला रास नहीं आएगा, जिसकी वजह से पार्टी दो धड़ों में बंट सकती है। हरियाणा के बाद आकाश को दिल्ली विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी जिसमें मायावती की अनुमति के बिना अशोक सिद्धार्थ हस्तक्षेप करने लगे थे। अशोक के पास दक्षिण के राज्यों की जिम्मेदारी थी, पर वे खुद को मायावती का करीबी रिश्तेदार बताकर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को धमकाने लगे थे।
बसपा सुप्रीमो मायावती।
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बीते कुछ दिनों में बसपा नेताओं के लिए शादियां मुसीबत बन गई हैंं। इससे पहले वरिष्ठ नेता मुनकाद अली के बेटे की शादी में शामिल होने पर पार्टी के कई नेताओं पर कार्रवाई की गई थी। पार्टी ने इस शादी में बसपा नेताओं के जाने पर रोक लगाई थी। इसके बाद अशोक सिद्धार्थ के बेटे की शादी आगरा में हुई जिसमें आकाश आनंद तो मौजूद रहे, लेकिन बसपा सुप्रीमो ने दूरी बना ली। सूत्रों की मानें तो इस शादी में भी अशोक अपना शक्ति प्रदर्शन कर रहे थे, जो मायावती को रास नहीं आया। उनकी सहमति के बिना पार्टी के कई नेता शादी में गए थे जिससे वे नाराज थीं।
मायावती ने कहा कि जनहित व कल्याण के लिए केंद्र व यूपी की सरकार को अपनी कथनी और करनी में अंतर को कम करना होगा। महाकुंभ अगर अव्यवस्था, हादसा व हताहत-मुक्त होकर सरकारी दावे के अनुसार होता, तो बेहतर रहता। केंद्र और यूपी सरकार के बजट में दावों को हवाई बताते हुए उन्होंने कहा कि करोड़ों गरीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों एवं अन्य मेहनतकश लोगों के जीवन में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। सरकार इतनी ज्यादा दूरदर्शी हो गई है कि उसे देश के सवा सौ करोड़ लोगों की समस्याएं नहीं दिख रही हैं। उन्होंने कहा कि समय-समय पर कानून व्यवस्था व कार्यशैली को लेकर कोर्ट की कड़ी टिप्पणियों से स्पष्ट है कि यूपी में कानून का सही से राज नहीं, बल्कि भाजपा का पक्षपाती राज है। इससे जनता को न्याय मिलना मुश्किल हो गया है।