बसपा से आए नेताओं का स्वागत करते अखिलेश यादव
- फोटो : amar ujala
पूर्व मंत्री और बसपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष इंद्रजीत सरोज बृहस्पतिवार को 94 प्रमुख नेताओं व हजारों समर्थकों के साथ सपा में शामिल हो गए। उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में 2019 में मोदी का रथ रोकने और 2022 में प्रदेश में सपा सरकार बनाने का संकल्प जताया। अखिलेश ने कहा, सपा के दरवाजे अब सभी के लिए खोल दिए गए हैं।
अखिलेश यादव ने प्रदेश कार्यालय के जनेश्वर मिश्र सभागार में इंद्रजीत सरोज व उनके साथ आए प्रमुख नेताओं को लाल टोपी पहनाकर सपा में शामिल किया। उन्होंने सरोज व उनके साथियों के सपा में शामिल होने का स्वागत करते हुए कहा, आप सभी सपा को अपना ही घर समझें। जमीनी नेताओं के आने से पार्टी को मजबूती मिलेगी। सपा में लोकतांत्रिक व्यवस्था है। यहां सभी अपनी बात रख सकते हैं।
गरीबों को न्याय दिलाने की लड़ाई सपा लड़ती रही है। कहा कि यूपी सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य है। यहां बेरोजगारों, किसानों की खुशहाली से ही देश आगे बढ़ेगा। भाजपा सरकार ने कर्जमाफी के नाम पर किसानों के साथ धोखा किया है। भाजपा ने जो श्वेतपत्र जारी किया है वह सफेद झूठ है।
नोटबंदी एवं जीएसटी से अर्थव्यवस्था बिगड़ी है। भाजपा राज में कानून व्यवस्था बदहाल है। सपा पिछड़ों, गरीबों और समाज के सभी वर्गों के हितों के लिए काम करेगी। उन्होंने भाजपा की नीयत से सावधान किया कि पता नहीं चुनाव के समय कौन सी अफीम निकाल लाएं।
बाद में सपा कार्यालय में आयोजित सभा में अखिलेश के अलावा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरनमय नंदा, नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी, अहमद हसन, नरेश उत्तम पटेल, पूर्व स्पीकर माता प्रसाद पांडेय, बलराम यादव, राजेंद्र चौधरी आदि ने भी बसपा से आए नेताओं व कार्यकर्ताओं का स्वागत किया।
ये प्रमुख लोग हुए साइकिल पर सवार
कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते इंद्रजीत सरोज।
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इंद्रजीत सरोज, पूर्व मंत्री हीरा मणि पटेल, पूर्व विधायक आसिफ जाफरी, लखनऊ जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष राधेलाल रावत, अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष इंशराम अली, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष देवकली प्रसाद रावत, सरोजनीनगर क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी शिव शंकर सिंह उर्फ शंकरी सिंह, बसपा के कई पूर्व जिलाध्यक्ष, विधानसभा क्षेत्रों के पूर्व प्रत्याशी, मंडल कोऑर्डिनेटर, जिला पदाधिकारी व जिला पंचायत सदस्य।
बसपा में थी मोदीराज की तरह अघोषित इमरजेंसी
सरोज ने कहा, बसपा में बोलने की आजादी नहीं थी। वहां वैसी ही अघोषित इमरजेंसी थी जैसी अब पीएम मोदी के राज में चल रही है। कहा, हमने सपा में आने का फैसला सोच-समझकर लिया है। छात्र जीवन से बसपा से जुड़ा था और धर्मनिरपेक्ष विचारधारा में विश्वास रखता हूं। हम किसी लोभ के लिए नहीं बल्कि संघर्ष के लिए सपा में आए हैं।