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कांग्रेस के साथ नये सियासी समीकरण बना रही हैं मायावती

Sun, 12 Jun 2016 01:51 AM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
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बसपा सुप्रीमो मायावती - फोटो : amar ujala
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सूबे में सपा और बसपा का गठजोड़ तो मुमकिन नहीं है लेकिन बसपा सुप्रीमो मायावती कांग्रेस के साथ सियासी रिश्ते को तेजी से आगे बढ़ाती नजर आ रही हैं। पिछले दिनों उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार को बचाने में अहम भूमिका निभाने के बाद मायावती ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों को चुनाव जितवाकर इसका साफ संकेत कर दिया है।
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यूपी में बसपा ने द्वितीय वरीयता के काफी मत कांग्रेस प्रत्याशी कपिल सिब्बल को दिलाकर उनकी जीत सुनिश्चित कराई।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि दलित वोटों में भाजपा की सेंधमारी से बसपा नेतृत्व खासा चौकन्ना है। भाजपा का दलित वोटों पर जैसे-जैसे फोकस बढ़ा है, मायावती वैसे-वैसे भाजपा के खिलाफ आक्रामक होती जा रही हैं।

वे तीन बार भाजपा के सहयोग से सत्ता तक पहुंचने की बात को भी याद नहीं करना चाहतीं। पूरे देश में जब कांग्रेस को झटके पर झटके लग रहे हैं, मायावती लगातार कांग्रेस को ताकत देने में जुटी हैं।
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कांग्रेस कहीं भी अपने प्रत्याशियों को जिताने की स्थिति में नहीं

उत्तराखंड में जब भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी, मायावती ने अपने दो विधायकों के वोट हरीश रावत सरकार को दिलाए। अब राज्यसभा चुनाव में मध्य प्रदेश हो या यूपी और उत्तराखंड, कहीं भी कांग्रेस अपने बलबूते सभी प्रत्याशियों को जिता पाने की स्थिति में नहीं थी।

मायावती ने न सिर्फ मध्य प्रदेश में 4 व उत्तराखंड में अपने दो विधायकों के वोट कांग्रेस प्रत्याशियों के पक्ष में दिलाने का फैसला किया, बल्कि यूपी में कांग्रेस प्रत्याशी व पूर्व मंत्री कपिल सिब्बल के लिए दूसरी वरीयता के जरूरी मतों में बड़ा सहयोग दिलाकर उनकी जीत में अहम भूमिका निभाई।

संकेत साफ है कि बसपा बेशक विधानसभा चुनाव में किसी से भी गठबंधन न करने की दुहाई देती रहे, पर सियासत में भविष्य के नए समीकरण बुनने का काम मायावती ने शुरू कर दिया है।

वे भाजपा और सपा में मिलीभगत का आरोप लगाती रही हैं। तेजी से बन रहे इस समीकरण को बसपा और कांग्रेस की सियासी ‘मिलीभगत’ का संकेत भी मान सकते हैं।
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जोखिम नहीं सेफ गेम पर बसपा का भरोसा

बसपा ने राज्यसभा के लिए अपने दोनों प्रत्याशियों सतीश चंद्र मिश्र और डॉ. अशोक सिद्धार्थ की जीत तय करने के लिए किसी भी तरह का जोखिम न उठाने का फैसला किया।

बसपा को अपने दोनों प्रत्याशियों को जिताने के लिए 34-34, कुल 68 वोटों की दरकार थी। बसपा के कुल 80 वोटों में चार बागियों को छोड़कर 76 वोट बचते थे। इस तरह अपने प्रत्याशियों को जिताने के बावजूद बसपा के पास 8 वोट बच रहे थे, पर पार्टी के वोटों के प्रबंधक इतने से संतुष्ट नहीं हुए।

उन्होंने 5 अतिरिक्त वोटों का इंतजाम किया और प्रथम वरीयता के सभी 81 वोट अपने दोनों प्रत्याशियों में बंटवा दिए।

सतीश चंद्र मिश्र को 39 और डॉ. अशोक सिद्धार्थ को 42 वोट मिले। प्रत्यक्ष तौर पर बसपा ने किसी अन्य प्रत्याशी को यहां सपोर्ट नहीं किया, पर जानकार बताते हैं कि कांग्रेस प्रत्याशी कपिल सिब्बल को बसपा की दूसरी वरीयता के कई वोट मिले।

बसपा प्रत्याशियों को मिले वोट
सतीश चंद्र मिश्र--39
डॉ. अशोक सिद्धार्थ--42

बसपा के कुल वोट--80
बागी--04
पक्ष में वोट--76
बसपा प्रत्याशियों को प्रथम वरीयता के वोट मिले--81
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