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Lucknow News : उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने दिए निर्देश, सांस व दिल के मरीजों के इलाज के पर्याप्त इंतजाम करें

Mon, 05 Dec 2022 07:54 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सांस के मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत अधिक पड़ती है। ऐसे में अस्पतालों में ऑक्सीजन की पुख्ता व्यवस्था रखें। जिन अस्पतालों में पाइप लाइन से ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है, वहां सिलेंडर की अतिरिक्त व्यवस्था की जाए।
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उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में सर्दी बढ़ने के साथ ही दिल और सांस के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। ऐसे में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सभी मेडिकल कॉलेजों एवं अस्पतालों केअधीक्षकों को व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों मेंजांच सुविधा, दवा और 24 घंटे इमरजेंसी में डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ  मुस्तैद रखने के निर्देश दिए हैं। चेतावनी दी है कि ड्यूटी में किसी भी तरह की लापरवाही बतरने वालों पर सख्त कर्रवाई की जाएगी।

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प्रदेश के सभी सीएमओ, सीएमएस और मेडिकल कॉलेज के प्रधनाचार्यों व चिकित्सा अधीक्षकों की वर्चुअल बैठक को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि ओपीडी एवं इमरजेंसी में सांस और दिल के रोगियों की प्राथमिकता केआधार पर इलाज किया जाए। अस्पतालों में रोगियों की मुफ्त पैथोलॉजी व रेडियोलॉजी जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इस बात का भी ध्यान रखा जाए कि सभी अस्पतालों की इमरजेंसी में पर्याप्त दवा का इंतजाम रहे।

ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था करें
उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सांस के मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत अधिक पड़ती है। ऐसे में अस्पतालों में ऑक्सीजन की पुख्ता व्यवस्था रखें। जिन अस्पतालों में पाइप लाइन से ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है, वहां सिलेंडर की अतिरिक्त व्यवस्था की जाए। मरीजों को किसी भी दशा में असुविधा नहीं होनी चाहिए। यह सुनिश्चित करें कि लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भी ठीक से काम करें। अधिकारी समय.समय पर उपकरणों को चलवा कर परख लें।
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बाईपैप की सुविधा रखें
उन्होंने निर्देश दिया कि गंभीर सांस के मरीजों को बाईपैप पर रखने की आवश्यकता पड़ती है। बड़े अस्पताल बाईपैप मशीन की व्यवस्था कर लें। ताकि सांस के मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मुहैया कराई जा सके। खून में ऑक्सीजन की मात्रा का पता लगाने के लिए एबी जांच भी सुनिश्चित की जाए। ईसीजी व ईको जांच भी सुनिश्चित करें। हार्ट अटैक का पता लगाने के लिए ट्रॉप्टी जांच भी तय सेंटरों में होती रहे। 108 व 102 एम्बुलेंस सेवा भी अलर्ट मोड में काम करें।

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