ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी-3 के तहत इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में लगी प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण ब्रह्मोस मिसाइल का आधुनिक लाइव मॉडल है। पहले से हल्की और ज्यादा घातक ब्रह्मोस एनजी 2024 से सेना के उपयोग में आनी है। इसे लखनऊ में प्रस्तावित यूनिट में बनाने की योजना है। इससे जहां देश की ताकत बढ़ेगी तो यह मिसाइल लखनऊ को सैकड़ों की संख्या में रोजगार भी देगी।
प्रदर्शनी में मौजूद ब्रह्मोस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से जुड़े अधिकारी ने बताया कि दो साल में कानपुर रोड पर करीब 198 एकड़ में यह फैक्ट्री तैयार हो जाएगी। डीआरडीओ इस पर करीब 300 करोड़ रुपये खर्च करेगा। फैक्ट्री में मिसाइल रखने की सुविधा के अलावा ट्रांजिट, इंटीग्रेशन, एक्सप्लोसिव इंटीग्रेशन, सोलर स्टेशन के अलावा प्रशासनिक भवन का निर्माण भी होगा। इससे लखनऊ में 500 इंजीनियर व तकनीकी सहायकों को रोजगार मिलेगा। वहीं, सैकड़ों की संख्या में प्रत्यक्ष रोजगार भी विकसित होंगे।
ज्यादा तेज व घातक होगी ब्रह्मोस एनजी
एक अधिकारी ने बताया कि ब्रह्मोस का नया वर्जन हल्का है। वहीं, इसकी गति भी पहले की तुलना में 2.8 मैक से बढ़कर 3.5 मैक हो गई है। इसका वजन 2.5 टन से घटकर 1.5 टन रह गया है। ऐसे में अब सुखोई-30 पहले जहां एक मिसाइल ही ले जा पाता था, अब पांच मिसाइल तक जा पाएंगी। तेजस में दो मिसाइल के साथ सेना टेस्ट भी कर चुकी है।
जल, थल, नभ तीनों जगह उपयोगी
डीआरडीओ के अधिकारियों का कहना है कि यह मिसाइल सेना के तीनों अंगों के लिए उपयोगी है। इसका भी डेमो दिया गया है। एयरफोर्स के लिए सुखोई फाइटर जेट के अलावा आर्मी के लिए मोबाइल ऑटोनॉमस लांचर, नेवी के लिए डेस्ट्रॉयर शिप पर ब्रह्मोस का डेमो से प्रदर्शन यहां किया गया है।
अन्य रक्षा उत्पादों का भी होगा शोध
ब्रह्मोस मिसाइल के अलावा अन्य रक्षा उत्पादों पर शोध भी लखनऊ में ही होगा। इसके लिए ट्रांसपोर्टनगर में एक डीआरडीओ लैब तैयार हो रही है। डीआरडीओ लैब और ब्रह्मोस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को मिलाकर करीब 10 हजार करोेड़ रुपये का निवेश लखनऊ में होना है।