उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने शनिवार को ब्राह्मण समाज के जिला व लोकसभा संयोजकों के साथ ब्राह्मण व दलित समुदाय के जिला उपाध्यक्षों व अन्य पदाधिकारियों के साथ यहां एक लंबी बैठक की।
इसमें इन पदाधिकारियों से राज-समाज का फीडबैक लिया और इन्हें गांव व बूथ स्तर तक संगठन को कैडर कैंप के जरिए तेजी से जोड़ने का निर्देश दिया।
मायावती ने कहा कि सपा सरकार के डेढ़ साल से कम समय में ही परेशान और उत्पीड़ित महसूस कर रहा ब्राह्मण समाज बसपा को लोकसभा चुनाव में बैलेंस आफ पावर बनाने को तैयार है।
बसपा सुप्रीमो ने पदाधिकारियों को समझाया कि सांप्रदायिक दंगे लगातार होने से मुस्लिम समुदाय सपा से छला महसूस कर रहा है। इसी तरह ब्राह्मण व सर्वसमाज के अन्य लोग सरकार की कार्यशैली से क्षुब्ध हैं।
इसके उलट बसपा ने संगठन हो या सत्ता ब्राह्मणों और मुस्लिमों के साथ अन्य समाज को हमेशा अच्छा मौका दिया। इसके अलावा आगामी लोकसभा चुनाव में भी सर्वाधिक 21 प्रत्याशी ब्राह्मण उतारे। यदि ब्राह्मण फिर पार्टी के साथ ठीक से जुड़ गए तो अन्य सीटों के अलावा सुरक्षित 17 सीटों का गणित देखने वाला होगा।
उन्होंने अपने सरकार की विस्तार से उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि बसपा ने पंचायत विभाग में 1.10 लाख, पुलिस में सवा दो लाख पदों की भर्तियों के अलावा शिक्षकों की एक लाख भर्ती की शुरुआत कर सर्वसमाज को सीधा फायदा पहुंचाया। गैर सरकारी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराए गए। ऐसे में कुछ लोगों को लैपटॉप व बेरोजगारी भत्ता देने से जनता उनके बहकावे में आने वाली नहीं है।
वह विधानसभा चुनाव का बदला लेने को बेताब है। ऐसे में बसपा को जिताने के लिए जुट जाना चाहिए। यहां पदाधिकारियों को एक पत्रक बांटा गया जिसमें विभिन्न मुददों पर मायावती के रुख के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। यह पत्रक जनता के बीच लोगों को बीएसपी से जोड़ने में काम आएगा।
कांग्रेसी मंत्रियों ने नहीं देखी गरीबी
मायावती ने कहा कि जिन लोगों ने जिंदगी में कभी गरीबी नहीं देखी वे ही पांच या 12 रुपये में भर पेट भोजन की बात कर सकते हैं। पूरे देश में गरीबों की दयनीय हालत बनी हुई है। बढ़ती महंगाई में ऐसी बातें करना गरीबों के साथ भद्दा मजाक है।
लोक सेवा आयोग के आरक्षण नियमों में बदलाव का विरोध
बसपा सुप्रीमो ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के नए आरक्षण नियमों पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने नए नियमों का विरोध कर रहे छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया और कोर्ट से उनके मुकदमे वापस लेने और रिहा करने की अपील की। मायावती ने कहा कि यूपीपीएससी केआरक्षण नियमों में बदलाव यादवों को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है।
इससे नौकरियों में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के अवसर कम हो जाएंगे। कहा कि सरकार ने कोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए पुरानी आरक्षण नीति को बहाल करने का फैसला लिया है। उन्होंने उम्मीद जर्ताई कि अन्य समाज के लोग चुनावों में सपा को सबक सिखाएंगे। उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों की रिहाई और मुकदमे वापसी की भी अपील की।