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यूपी में दलित-मुस्लिम बनाते हैं पूर्ण बहुमत की सरकार, अब तक ये रहा है समीकरण

Mon, 13 Feb 2017 07:03 AM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
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बसपा ने अपनी सोशल इंजीनियरिंग में दलित-ब्राह्मण की जगह दलित-मुस्लिम पर फोकस कर दिया है। विश्लेषक बताते हैं कि सवर्ण खासकर ब्राह्मण-ठाकुर ‘फ्लोटिंग वोटर’ में शामिल हैं। ये समय और समीकरण के हिसाब से इधर-उधर होते रहते हैं।
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मुस्लिम भाजपा विरोध में सपा या बसपा में जिसे मजबूत देखता है, उधर चला जाता है। इसके अलावा पिछले ढाई दशक की बात करें तो सूबे की दलित-मुस्लिम बहुल 200 से ज्यादा सीटों में जो भी पार्टी ज्यादा सीट पाई है, वही पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई है।

संभवत: इसी वजह से बसपा ने सत्ता की मास्टर-की के लिए इस बार दलित-मुस्लिम (डीएम) फार्मूले पर फोकस बढ़ाया है। हालांकि इसका सारा दारोमदार मुस्लिम मतदाताओं के रुख पर टिका हुआ है।
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राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सूबे की कुल 403 विधानसभा क्षेत्रों में 130 मुस्लिम बहुल हैं। इसके अलावा 85 सीटें अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए सुरक्षित हैं।

अब तक ये रहा है पूर्ण बहुमत का गणित

- फोटो : amar ujala
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. गोपाल प्रसाद कहते हैं कि पिछले ढाई दशक में तीन बार वर्ष 1991, 2007 और 2012 में ही पूर्ण बहुमत की सरकार बन पाई है। पहले भाजपा, फिर बसपा और वर्ष 2012 में सपा ने यह उपलब्धि हासिल की।

इसमें गौर करने वाली बात ये है इन तीनों ही दलों की पूर्ण बहुमत की सरकार में दलित व मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्रों में जीती गई सीटों का आधे से अधिक का योगदान रहा है। भाजपा ने इन सीटों में 126, बसपा ने 121 व सपा ने सबसे ज्यादा 137 सीटें झटकी थीं।

प्रो. प्रसाद बताते हैं, अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर जीत का मतलब मुस्लिम प्रत्याशी के जीतने से नहीं है, बल्कि उन क्षेत्रों में संबंधित पार्टी के किसी भी वर्ग के प्रत्याशी को मिलने वाली जीत से है।

असल में भाजपा को अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर कामयाबी मुस्लिम मतों के बंटवारे पर मिलती है, जबकि सपा और बसपा को यही कामयाबी इस वर्ग के समर्थन से मिलती आई है।
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भाजपा, सपा व बसपा ने इस तरह बनाई है सरकार

- फोटो : SELF
भाजपा : वर्ष 1991 में इन क्षेत्रों से जीती 126 सीटें
भाजपा वर्ष 1991 में सूबे में पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई थी। उस वक्त पार्टी ने 221 सीटें जीतकर अपने बल बूते सरकार बनाई। भाजपा उम्मीदवार अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में 76 और 50 आरक्षित सीटों विजयी हुए थे। कुल जीती गई सीटों में इन क्षेत्रों का आधे से ज्यादा 126 सीटों का योगदान रहा।

बसपा : वर्ष 2007 में 121 सीटें पाने में रही कामयाब
बसपा 16 वर्ष बाद 2007 में एक बार फिर पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाई। विश्लेषक बताते हैं कि बसपा की सरकार बनवाने में सवर्ण का अहम योगदान रहा है। पर, गौर करने वाली बात है कि पार्टी ने जो 206 सीटें जीती थी, उसमें से 59 सीटें अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों से, जबकि 62 सुरक्षित सीटें शामिल थीं। यह जीती सीटों का आधा से भी ज्यादा 121 था।

सपा : वर्ष 2012 में सबसे ज्यादा 137 सीटें झटकी
वर्ष 2012 में समाजवादी पार्टी ने सूबे में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। सपा को कुल 224 सीटें मिली थीं। इनमें से पार्टी के 78 विधायक अल्पसंख्यक बहुल विधानसभा क्षेत्रों में जीतने में सफल हुए थे। जबकि 59 अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित सीटें शामिल थीं। यह कुल जीती सीटों में 137 है।
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