छात्रों को परेशान करने के लिए न बनाएं पेपर
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से कहा कि छात्रों का पसीना छुड़ाने के लिए परीक्षा के पेपर न बनाएं। छात्रों को परेशान न करें। उन्होंने कहा कि प्रश्न ऐसा हो कि छात्र थोड़े प्रयास से उसे हल कर सके। सीएम ने कहा कि नौ साल पहले बोर्ड परीक्षा में नकल होती थी। शिक्षक भर्ती नहीं होती थी। विद्यालय भी वैसे ही थे। छात्रों को पता था कि अंत में ठेका ही होना है तो मेहनत क्यों करे।
धर्म की स्थापना के लिए सुदर्शन की भी जरूरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने विद्या को केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं रखा। हम ऐसी विद्या दें जो जीवन के हर क्षेत्र में मुक्ति का मार्ग साफ करे। चुनौतियों से लड़ने की प्रेरणा दे और समाज व राष्ट्र को आगे बढ़ाए। हमारे यहां श्रीराम भी थे और श्रीकृष्ण भी।
मुरली की जरूरत मथुरा में थी, कभी सुदर्शन की जरूरत धर्म की स्थापना के लिए पड़ती है। तभी हम आगे बढ़ पाते हैं। दुनिया में भारत का सम्मान इसलिए था क्योंकि हमारे पास ज्ञान की सबसे बड़ी धरोहर थी। यह मेधावी सम्मान उसी कड़ी का हिस्सा है।
लड़के ज्यादा लगा रहे झाड़ू-पोछा
सीएम ने कहा कि इस राज्य स्तरीय परिणाम में कुल 223 विद्यार्थी हैं। इसमें छात्र 85, छात्राएं 138 हैं। छात्राएं मेरिट सूची में ज्यादा और छात्र कम आए हैं। हाईस्कूल में 115 में से 34 छात्र व 81 छात्राएं हैं। इंटर में 9 छात्र व 14 छात्राएं हैं।
उन्होंने कहा कि छात्राएं ज्यादा मेहनत कर लेती हैं। ज्यादा अंक पाने की सामर्थ रखती हैं। उन्होंने मेरिट से छात्रों की संख्या कम होने पर तंज कसा कि लगता है अब लड़के झाड़ू-पोंछा, ज्यादा लगाने लगे हैं। सीएम ने कहा लड़के छात्राओं से प्रेरणा लें और अच्छे नंबर लाएं।
जहां भी अच्छा ज्ञान मिले, लेने के लिए तैयार रहें
सीएम ने कहा कि यह भ्रम कभी न पालिए कि मैं ही सही हूं, बाकी सब गलत। व्यक्ति असफल तभी होता है? जब वह अति आत्मविश्वास से भर जाता है। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम हो या जीवन, हर छोटी बात पर ध्यान दीजिए। यह उम्र सबसे उपयुक्त है अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करने के लिए। जिस क्षेत्र में जाएं, उसका गहराई से अध्ययन करें।