ऊंचाहार (रायबरेली)। एनटीपीसी परियोजना में कोयले की किल्लत को दूर करने के लिए रविवार रात से मालगाड़ियां पहुंचने लगीं। दो दिन में 13 मालगाड़ियों से लगभग 50 हजार मीट्रिक टन कोयला पहुंच गया है। इसके बाद बंद पड़ी दोनों यूनिटों से पूरी क्षमता के साथ बिजली उत्पादन शुरू हो गया है।
एनटीपीसी परियोजना की 210-210 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता की पांच यूनिट स्थापित हैं। छठवीं यूनिट 500 मेगावाट बिजली का उत्पादन करती है। लगभग एक हफ्ते से परियोजना में कोयले का स्टाक खत्म हो गया था। इसके चलते रविवार रात यूनिट पांच व छह बंद हो गई थी। बाकी यूनिटों के भी बंद होने का खतरा मंडरा रहा था।
यूनिटों के बंद होने से बिजली संकट पैदा हो गया था, लेकिन इस बीच रविवार रात 12 बजे के बाद सोमवार शाम सात बजे तक आठ मालगाड़ियां कोयला लेकर परियोजना पहुंच गईं। कोयले की कई रैक पहुंचने से परियोजना प्रबंधन ने राहत की सांस ली। सोमवार दोपहर बाद पांच नंबर यूनिट चालू की गई। देर रात छठवीं यूनिट से भी बिजली उत्पादन शुरू कर दिया। रविवार रात से मंगलवार की दोपहर तक परियोजना में 13 मालगाड़ियां कोयला लेकर पहुंची हैं।
कोयला आने के बाद सभी यूनिटों ने पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन शुरू हो गया है। स्टेशन अधीक्षक विनोद कुमार त्रिपाठी ने बताया कि कोयले की रैक लगातार परियोजना पहुंच रहीं हैं। उधर, एनटीपीसी परियोजना की जनसंपर्क अधिकारी कोमल शर्मा ने बताया कि पांचवीं और फिर छठवीं यूनिट से भी बिजली उत्पादन शुरू हो गया है।
इनसेट
प्रतिदिन चाहिए 22 हजार मीट्रिक टन कोयला
परियोजना की सभी छह यूनिटों से 1550 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए प्रतिदिन लगभग 22 हजार मीट्रिक टन कोयला लगता है। परियोजना में आपात स्थिति के लिए लगभग छह लाख मीट्रिक टन कोयले का भंडारण होता है। सूत्रों के मुताबिक परियोजना के पास इस समय लगभग 30 हजार मीट्रिक टन कोयला स्टाक में है, लेकिन परियोजना के अधिकारी पर्याप्त मात्रा में कोयला उपलब्ध होने की बात कह रहे हैं।