लखनऊ। महज 20 साल की उम्र में युवक के दोनों कूल्हे इस कदर जाम हो गए कि न ठीक से खड़ा हो पा रहा था और न चल-फिर सकता था। एसजीपीजीआई के डॉक्टरों ने करीब चार घंटे की सर्जरी में दोनों कूल्हे एक साथ बदल दिए। ऑपरेशन के बाद युवक अपने पैरों पर पूरा वजन डाल पा रहा है। जल्द ही उसे अस्पताल से छुट्टी मिलने की उम्मीद है।
गाजीपुर निवासी अंकित यादव (20) को पहले संस्थान के इम्यूनोलॉजी विभाग में इलाज के लिए भेजा गया था। जांच में पता चला कि उसका दायां कूल्हा पूरी तरह और बायां आंशिक रूप से जाम हो चुका है। दायां कूल्हा 40 डिग्री और बायां 10 डिग्री मुड़ी स्थिति में फिक्स था।
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ऑर्थोपेडिक्स विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. कुमार केशव के नेतृत्व में डायरेक्ट एंटीरियर अप्रोच (डीएए) तकनीक से दोनों कूल्हे बदले गए। इस तकनीक में मांसपेशियों को काटने के बजाय उनके बीच से रास्ता बनाकर कूल्हे तक पहुंचा जाता है। इससे मरीज को जल्दी रिकवरी में मदद मिलती है। डॉ. केशव ने अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिल्वेनिया में इस तकनीक का प्रशिक्षण लिया है।
एनेस्थीसिया टीम से एडिशनल प्रोफेसर डॉ. वंश प्रिया, डॉ. शिप्रा सिंह, डॉ. दीक्षा, सर्जिकल टीम में डॉ. उत्कर्ष, डॉ. शैलेंद्र, नर्सिंग स्टाफ के सचिन व कमलेश ने सहयोग किया।