लखनऊ। गोमती रिवरफ्रंट पर आयोजित गोमती पुस्तक महोत्सव में शनिवार को लेखकगंज में रेडियो की दुनिया के तीन लोकप्रिय कलाकार आरजे शशांक, तृप्ति और प्रतीक ने माइक के पीछे की दुनिया से परदा हटाते हुए कई दिलचस्प अनुभव साझा किए। वहीं रविवार को महोत्सव का आखिरी दिन बेहद खास होगा जिसमें कला, साहित्य के साथ कॅरिअर संबंधी विभिन्न आयोजनों के साथ ही लेखकगंज में महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। पुस्तकों के शौकीनों के लिए खरीद का भी बेहतर अवसर होगा।
शनिवार को विशेष आयोजन में आरजे शशांक ने बताया कि कैसे आधुनिक सामाजिक परिवेश में लोगों को एक ऐसी आवाज की जरूरत महसूस होती है जिससे वह अपने सुख-दुख साझा कर सकें। ऐसे में आरजे से लोगों का खास रिश्ता बन जाता है। आरजे तृप्ति ने बताया कि हम कभी डॉक्टर, तो कभी पुलिस, तो कभी अभिभावक की भूमिका निभाते हैं। आरजे प्रतीक ने कोरोना काल के अनुभव को साझा किए।
पूर्वांचल भविष्य का सबसे बड़ा बाजार
लेखकगंज में प्रसिद्ध उद्यमी व डेयरी उद्योग के अग्रणी जय अग्रवाल ने कायमगंज (फर्रुखाबाद) जैसी छोटी सी जगह से निकलकर प्रदेश के सबसे लोकप्रिय ब्रांड के रूप में ज्ञान डेयरी को स्थापित करने के अपने सफर पर चर्चा की। युवाओं से चर्चा करते हुए कहा कि केवल स्थानीय उत्पादों के स्टैंडर्डाइजेशन से भी हजारों करोड़ के उद्यम प्रदेश में खासकर पूर्वांचल में स्थापित किए जा सकते हैं।
संजीव पालीवाल ने दिए युवाओं को टिप्स
लेखकगंज के एक सत्र में प्रसिद्ध हिंदी पत्रकार और लेखक संजीव पालीवाल ने अपनी नई पुस्तक ये इश्क नहीं आसां पर विचार साझा करते हुए बताया कि लेखक के लिए अनुशासन आवश्यक है। किसी भी पुस्तक को पूरा करने के लिए हमें उस पुस्तक को नियमित तौर पर कुछ निश्चित समय देना होगा। उन्होंने युवाओं को बताया कि जब उन्हें किसी भी कार्य को करने में आनंद आए तो उन्हें थकान नहीं होती है। पत्रकारिता भी ऐसा ही पेशा है जो हमें एक बेहतर इंसान बनाता है।
अंडमान-निकोबार में भी लखनऊ
लेखकगंज में ‘1857, सेल्युलर जेल और लखनऊ’ सत्र में पार्थसारथी सेन शर्मा ने अपनी यात्रा वृत्तांत ‘अंडमानुष निकोबारीज’ पर चर्चा करते हुए अंडमान-निकोबार के नामकरण और इतिहास सहित अनेक विषयों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सेल्युलर जेल से पहले ब्रिटिश वहां भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को रखते थे। वहां लखनऊ नाम का एक गांव भी था। उन्होंने इस पुस्तक में दूधनाथ तिवारी की कहानी का भी जिक्र किया है जिनका संबंध उत्तर प्रदेश से था। उन्होंने बताया कि आजादी के पहले कुछ वर्षों तक अंडमान-निकोबार पर जापान का भी आधिपत्य रहा। निकोबार एक समय डेनमार्क का हिस्सा था।
आज बच्चों से बड़ों के लिए बहुत कुछ
चिल्ड्रन कॉर्नर में कैलिग्राफी, कैरीकेचर और कॉमिक्स बनाने की कला सिखाई जाएगी और डिफेंस सर्विसेज में कॅरिअर बनाने की कार्यशाला होगी। लेखकगंज में नेताजी सुभाष चंद्र बोस और गुमनामी बाबा से संबंधित रहस्यों पर चर्चा करेंगे मिशन नेताजी संस्था के संस्थापक अनुज धर, प्रसिद्ध इतिहासकार व लेखक चंद्रचूड़ घोष और टीवी पत्रकार व लेखक आनंद नरसिम्हा।