रानीलक्ष्मीबाई संयुक्त चिकित्सालय।
लखनऊ। रानीलक्ष्मीबाई संयुक्त चिकित्सालय में हड्डी से जुड़े इलाज और ऑपरेशन बंद हो गए हैं। यहां कोई भी ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ तैनात नहीं है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन ने एनएचएम को पत्र भेजकर कई विशेषज्ञों की मांग की है, ताकि चिकित्सकीय सेवाएं बाधित न हों।
रानीलक्ष्मीबाई संयुक्त चिकित्सालय 100 बेड की क्षमता का अस्पताल है। यहां गाइनी, नेत्र रोग, जनरल सर्जरी, बर्न, मेडिसिन समेत अन्य यूनिट संचालित होती है। अस्पताल में पुनर्नियुक्ति पर तैनात हड्डी रोग विशेषज्ञ की सेवाएं समाप्त हो गई हैं। ऐसे में यहां अब कोई भी ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ नहीं बचा है। मरीजों को दूसरे अस्पताल जाना पड़ रहा है। ऐसे में हाथ-पैर में फ्रैक्चर होने की स्थिति में मरीजों को इलाज मिलना मुश्किल हो गया है। अस्पताल के सीएमएस डॉ. नीलम ने एनएचएम निदेशक को पत्र भेजकर ऑर्थोपैडिक, ईएनटी, बेहोशी व आयुष फार्मासिस्ट तैनात करने की मांग की है।
बेहोशी का विशेषज्ञ नहीं
अस्पताल की ओटी संचालन में संकट खड़ा हो गया है। यहां कोई भी स्थायी बेहोशी का विशेषज्ञ भी तैनात नहीं है। अफसरों ने एक बेहोशी डॉक्टर को यहां पर अटैच किया है, जिनके जरिये सेवाएं दी जा रही है। डॉक्टर की गैर हाजिरी में ओटी बंद हो जाती है। ऐसे में मरीजों के ऑपरेशन टालने तक की नाैबत आ जाती है। सीएमएस डॉ. नीलम ने बताया कि ऑन कॉल भी एक विशेषज्ञ को बुलाया जाता है।
ईएनटी की ओपीडी महज तीन दिन
अस्पताल में एक ही ईएनटी विशेषज्ञ तैनात हैं। जिनके जरिये हफ्ते में तीन दिन ओपीडी चलती है, जबकि तीन दिन ओटी चल रही है। ओटी के दिन आने वाले मरीजों को निराश लौटना पड़ रहा है।