लखनऊ के जिला व सत्र न्यायालय भवन के प्रथम तल पर स्थित टॉयलेट में बुधवार शाम हुए विस्फोट से अफरा-तफरी और हड़कंप मच गया। विस्फोट से टॉयलेट के फ्लश और दरवाजे के चीथड़े उड़ गए। जानकारी पाकर जिला जज आरके उपाध्याय, एसएसपी दीपक कुमार सहित कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंच गई।
बम निरोधक दस्ता व फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। हालांकि बारूद या अन्य किसी प्रकार का विस्फोटक नहीं पाया गया। जांच के लिए सैंपल एकत्र किए गए हैं। एसएसपी ने बताया कि जिला एवं सत्र न्यायालय भवन में भूतल पर जिला न्यायाधीश, अपर जिला न्यायाधीश प्रथम और अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम की अदालतें हैं, जबकि पहले व दूसरे तल पर सिविल कोर्ट हैं। धमाके से जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है।
धमाका शाम चार बजकर सात मिनट पर न्यायालय भवन के प्रथम तल पर स्थित वॉशरूम के तीन टॉयलेट में से बीच वाले में हुआ था। उस वक्त न्यायालय परिसर व भवन में अधिवक्ताओं और वादकारियों की भीड़ न के बराबर थी। जिला जज आरके उपाध्याय व अन्य न्यायाधीश अपने-अपने ऑफिस में थे। धमाका होते ही कचहरी परिसर में सनसनी फैल गई। जिला जज सहित पुलिस अधिकारी और खुफिया टीम मौके पर पहुंच गई। धमाका काफी कम तीव्रता का था।
टॉयलेट का फ्लश क्षतिग्रस्त है और उसके आसपास विस्फोट से जलने जैसे काले निशान भी हैं। इससे ऐसा लग रहा कि धमाका फ्लश में ही हुआ है। अगल-बगल स्थित अन्य टॉयलेट पर धमाके का कोई असर नहीं पहुंचा है। उन्होंने सीवर की गैस की रासायनिक प्रक्रिया से धमाका होने की आशंका जताई है। एसएसपी का कहना है कि आगे की जांच के लिए टॉयलेट से सैंपल एकत्र किए गए हैं।
टॉयलेट के भीतर मिले बियर के कैन, कोरेक्स सिरप की शीशियां
एसएसपी ने बताया कि टॉयलेट के भीतर बियर के खाली कैन और कोरेक्स सिरप की खाली शीशियां मिली हैं। भीतर काफी मात्रा में माचिस और जली हुई तीलियां भी पड़ी थीं।
न्यायालय परिसर में स्थित टॉयलेट के भीतर नशे की सामग्री मिलने से यहां सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि बियर के कैन और कोरेक्स की शीशियां मिलने से साफ है कि लोग टॉयलेट के भीतर ही नशेबाजी कर रहे हैं।
अफवाहों ने फैलाई सनसनी
जिला एवं सत्र न्यायालय के टॉयलेट में धमाका होते ही राजधानी में अफवाहों का बाजार गरमा गया। त्यौहार के मौके पर पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के होश उड़ा दिए। किसी ने इसे आतंकी साजिश बताया तो कोई सुतली बम फटने की बात कह रहा था।
माचिस की तीलियां देखकर लोगों ने बम बनाने की भी आशंका जताई। हालांकि, फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स का कहना था कि भीतर मिली सामग्री से किसी भी प्रकार का बम अथवा विस्फोटक सामग्री नहीं बनाई जा सकती।
धमाके से सदमे में आए पड़ोसी टॉयलेट में मौजूद अधिवक्ता
- फोटो : amar ujala
धमाके के वक्त पड़ोस के टॉयलेट में मौजूद अधिवक्ता राजीव शुक्ला काफी देर तक सदमे में रहे। उन्हें साथी वकीलों ने संभाला। राजीव ने बताया कि वह अपने चार-पांच अधिवक्ता साथियों संग प्रथम तल पर थे।
साथियों को टॉयलेट के बाहर छोड़कर वह भीतर चले गए तभी धमाका हो गया। उन्होंने बताया कि धमाका इतना तेज था कि कुछ सेकंड के लिए कान सुन्न हो गए। वह चीखते हुए बाहर भागे। काफी देर तक वह सदमे में बैठे रहे।
सीसीटीवी कैमरों में नहीं मिला सुराग
जिस जिला एवं सत्र न्यायालय भवन के प्रथम तल पर विस्फोट हुआ, वहां चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। वजीरगंज एसओ पंकज कुमार सिंह का कहना है कि कैमरों की फुटेज निकलवाई गई लेकिन टॉयलेट में संदिग्ध वस्तु अथवा सामान लेकर कोई भी व्यक्ति आते-जाते नहीं दिखा।