लखनऊ। हुसैनगंज में बुधवार शाम पुराने किले इलाके में खेलते समय नाले में डूबे वीर (7) का शव अगले दिन सुबह करीब 11 बजे डीजीपी आवास के पास से गुजरे हैदर कैनाल में उतराता मिल गया। पुलिस ने शव एनडीआरएफ की मदद से निकलवाया और परिजनों को घटना की जानकारी दी।
पोस्टमार्टम हाउस पर पिता नन्हे अपनी मां सावित्री और पड़ोसियों के साथ पहुंचे। दादी पोते का शव देखते ही गश खाकर गिर पड़ीं। लोगों ने उनके चेहरे पर पानी छिड़क कर उन्हें होश में लाया। मगर उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। लोग उन्हें दिलासा दे रहे थे। वहीं, पिता भी फूट फूट कर रो रहे थे।
हाय मेरी बुढ़ापे की लाठी टूट गई....
हाय मेरा पोता... मेरा पोता... मेरी बुढ़ापे की लाठी टूट गई...। अब मैं उसके बिना कैसे जिऊंगी। कूड़ा बीनकर छह हजार रुपये जोड़े थे... सोचा था कि घर चलाने और बेटे के काम आएंगे। मगर मुझे क्या पता थे कि यही छह हजार पोते की अंतिम क्रिया काम आएंगे। अगर पता होता तो मैं रकम जोड़ती ही नहीं।
पहले पत्नी छोड़कर चली गई अब बेटा भी...
बेटा नहीं मिला, फिर भी एक उम्मीद लगी थी। इसी के चलते मैं और पड़ोसी चार घंटे तक नाले में तलाशता रहे। मगर सुबह जब पुलिस ने शव मिलने की सूचना दी तो सारी उम्मीदें खत्म हो गईं...ये वेदना थी नन्हे की। वह रोते हुए कह रहे थे। पत्नी के जाने के बाद दो बेटे ही सहारा थे। सोचा था कि वीर बड़ा होकर पहले सहारा देगा फिर अंतिम समय में मुझे कंधा देगा। मगर क्या पता था कि मैं वो बदनसीब पिता हूं जो अपने बेटे की अर्थी को सहारा देगा।
नम आंखों से बेटे को किया दफन
नन्हे ने मां से रुपये लेकर पोस्टमार्टम हाउस से ही ई रिक्शा किया और बेटे का शव लेकर तेलीबाग स्थित अंत्योष्टि स्थल ले गए। यहां उन्होंने अंतिम विदाई देकर उसे दफन कर दिया। दादी सावित्री ने नगर निगम पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना था कि अगर रेलिंग होती तो शायद आज पोता जिंदा होता।
ये है मामला
हुसैनगंज के पुराना किला में कबाड़ का काम करने वाले नन्हे मां सावित्री, बेटे वीर और शिवा के साथ रहते हैं। बुधवार शाम करीब छह बजे वीर पड़ोस के बच्चों के साथ घर से 50 मीटर की दूरी पर खेल रहा था। घटनास्थल पर रेलिंग नहीं लगी थी। खेलते हुए वीर का पैर फिसल गया था और वह नाले में गिरकर डूब गया था।
वीर का शव घर पहुंचने पर रोते-बिलखते परिजन।
वीर का शव घर पहुंचने पर रोते-बिलखते परिजन।
वीर का शव घर पहुंचने पर रोते-बिलखते परिजन।
वीर का शव घर पहुंचने पर रोते-बिलखते परिजन।
वीर का शव घर पहुंचने पर रोते-बिलखते परिजन।
वीर का शव घर पहुंचने पर रोते-बिलखते परिजन।
वीर का शव घर पहुंचने पर रोते-बिलखते परिजन।