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नाव हादसा: अब तक नहीं मिले लापता हुए आठ लोग, खाली हाथ रही रेस्क्यू टीम; बुलाए गए सोनार टेक्निक विशेषज्ञ

Sat, 01 Nov 2025 07:29 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला संवाद, बहराइच

सार

Bahraich boat accident: बहराइच नाव हादसे को चार दिन बीत गए हैं। बावजूद इसके अब तक आठ लापता लोग नहीं मिल सके हैं। शनिवार को पूरे दिन रेस्क्यू अभियान चलता रहा। 
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बहराइच नाव हादसा। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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भरथापुर नाव हादसे के बाद से कौड़ियाला नदी में लापता आठ ग्रामीणों की तलाश चौथे दिन भी जारी रही, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। शनिवार सुबह पुनः शुरू किए गए रेस्क्यू ऑपरेशन में अब गोरखपुर से बुलाए गए सोनार तकनीक के विशेषज्ञ भी जुट गए हैं। इसके बावजूद अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। पूरे दिन तट पर बैठे लोग नदी की ओर टकटकी लगाए रहे। लेकिन शाम ढलते ही सभी निराश हो गए। बुधवार देर शाम को भरथापुर घाट पर हुए नाव हादसे में 22 लोग नदी में गिर गए थे, जिनमें से 13 को सुरक्षित निकाल लिया गया था जबकि एक महिला का शव मिला था। अब भी पांच बच्चों समेत आठ लोग लापता हैं, जिनकी तलाश में टीमें जुटी हैं। लेकिन शनिवार को चौथे दिन भी निराशा हाथ लगी।

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सुबह होते ही नदी किनारे ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। सबकी निगाहें नदी पर टिकी रहीं, लेकिन हर बीतते पल के साथ उम्मीदें कमजोर होती गईं। तेज बहाव के चलते गोताखोरों की टीम शनिवार को नदी में सिर्फ दो बार ही उतरी लेकिन खाली हाथ रही। बहाव तेज होने से गोताखोर ठहर नहीं पा रह थे। इसके बाद गोरखपुर से आए सोनार टेक्निक (ध्वनि आधारित दिशा-निर्धारण और माप तकनीक) विशेषज्ञों ने मोर्चा संभाला। लेकिन शाम तक सफलता नहीं मिली।

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जानिए कैसे काम करती है सोनार तकनीकी

बहराइच नाव हादसा। - फोटो : अमर उजाला।
रेस्क्यू टीम ने बताया कि सोनार सिस्टम के जरिए नदी की गहराइयों में तलाश की जा रही है। यह सिस्टम सेंसर कैमरे की तरह काम करता है, जिसे पानी के भीतर डालकर लैपटॉप से मॉनिटर किया जाता है। इस अभियान में 11वीं राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) वाराणसी की टीम शामिल है, जिसका नेतृत्व उप-कमांडेंट प्रेम कुमार पासवान कर रहे हैं। उनके साथ निरीक्षक सभाजीत यादव और उप-निरीक्षक कुलदीप सिंह भी मौजूद रहे।

स्थानीय गोताखोरों को शामिल करने की मांगी है अनुमति
एसडीएम मिहींपुरवा रामदयाल ने बताया कि चौथे दिन भी लापता 8 लोगों का पता नहीं चल सका है। कौड़ियाला पहाड़ी नदी है, ऐसे में स्थानीय गोताखोर नदी की भौगोलिक दशा के बारे में पूरी तरह परिचित हैं। स्थानीय गोताखोरों को नदी में उतारने के लिए उच्चाधिकारियों से अनुमति मांगी गई है। कोशिश है रविवार सुबह से उन्हें भी एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम के साथ लगाया जाए। लेकिन रेस्क्यू अभियान नदी के बहाव पर भी निर्भर करेगा।
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