राजधानी के बाल महिला चिकित्सालयों में गर्भवती महिलाओं के प्रति डॉक्टरों की लापरवाही कम होने का नाम नहीं ले रही है। मंगलवार को गर्भवती महिला को उसके परिवारीजन प्रसव पीड़ा के बाद अस्पताल ले आए।
डॉक्टरों ने उसे इलाज देने की बजाए ये कहकर रेफर कर दिया की बच्चा पेट में मर चुका है। पेट में बच्चे की कोई हरकत नहीं है। डॉक्टरों ने उसे क्वीन मेरी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया लेकिन एंबुलेंस नहीं दी।
महिला की हालत गंभीर होते देख उसके पति प्राइवेट नर्सिंग होम ले गए, जहां उसने एक शिशु को जन्म दिया।
मंगलवार को नौबस्ता, मड़ियांव के रहने वाले तिवारीलाल की पत्नी किरन (34) को प्रसव पीड़ा के बाद उनके पति अलीगंज बाल महिला चिकित्सालय ले गए।
उन्होंने बताया कि पर्चा बनवाने के बाद वो ओपीडी कक्ष संख्या पांच में पहुंचे तो वहां मौजूद महिला डॉक्टरों ने किरन की जांच की।
इसके बाद डॉक्टर ने ये कहकर उसे क्वीन मैरी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया कि पेट में बच्चे का कोई मूवमेंट नहीं है और हो सकता है कि बच्चे की मौत हो गई है।
गर्भवती की हालत देखते हुए भी अस्पताल के डॉक्टर ने एंबुलेंस की कोई व्यवस्था नहीं कि जिसके बाद पति ने इलाज का पर्चा अस्पताल परिसर में ही फाड़ दिया।
इसके बाद वो खुद ही ऑटो की व्यवस्था कर के गोमतीनगर के एक निजी नर्सिंग होम में ले गए जहां शाम को उसने एक स्वस्थ्य शिशु को जन्म दिया।
पति का आरोप था कि उस वक्त अस्पताल में नई एंबुलेंस खड़ी थी, लेकिन डॉक्टरों के रवैये के चलते उसको परेशानी का सामना करना पड़ा।
उनका कहना था कि वो इस मामले की शिकायत नहीं करेंगे लेकिन अगर हालात ऐसे ही रहे तो किसी भी वक्त किसी गर्भवती महिला के साथ बड़ा हादसा हो सकता है।
सीएमएस का फोन हुआ बंद
जब इस बारे में अस्पताल की सीएमएस डॉ. अनुपम कटियार से फोन पर बात करने की कोशिश की गई तो उनका फोन बंद मिला।
जबकि अस्पताल सूत्रों की मानें तो वो मंगलवार को अस्पताल पहुंची थीं और ओपीडी में मरीजों को देखा भी था।
देर रात तक उनका मोबाइल बंद मिला जिससे आखिर चूक कहां और कैसे हुई इस बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी।