नियमानुसार हर ब्लड बैग पर बैच नंबर, एक्सपायर होने की तिथि, ब्लड निकालने की तिथि आदि का पूरा ब्यौरा होता है। लेकिन छह में से चार बैग पर ये जानकारियां नहीं थीं।
जल्द होगी आगे की कार्रवाई
एसजीपीजीआई की जांच रिपोर्ट एसटीएफ को सौंप दी गई है। मामले की विवेचना एसटीएफ की टीम कर रही है। अब वह जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। विभाग की ओर से जल्द ही इसमें ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।
- रमाशंकर, निरीक्षक औषधि प्रशासन
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
मिलावटी ब्लड से मरीज की जान जा सकती है। यदि किसी तरह जान बच भी गई तो किडनी, लीवर, हार्ट सहित कई बीमारियां हो सकती हैं। सबसे ज्यादा खतरा सेप्टीसीमिया का होता है। यही वजह है कि किसी भी मरीज को खून देने से पहले उसकी विधिवत जांच की जा जाती है। मिलावटी अथवा संक्रमित खून से मरीज का हिमोग्लोबिन बढने के बजाय तेजी से गिरने लगता है। यदि पकड़े गए खून की कल्चर रिपोर्ट पाजीटिव आई है तो वह खून परी तरह से संक्रमित है। उसे किसी मरीज को चढ़ाया नहीं जा सकता है।
- डा. तुलिका चंद्रा, विभागाध्यक्ष ट्रांसफ्यूजन विभाग केजीएमयू