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सात राज्यों में लाल खून के काले कारोबार का नेटवर्क

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एसटीएफ की टीम ने बृहस्पतिवार को खून तस्कर गिरोह का खुलासा किया। इस गिरोह ने अपने लाल खून के काले कारोबार को यूपी व राजस्थान ही नहीं बल्कि सात राज्यों में फैला रखा है। एसटीएफ की टीम अब यूपी-राजस्थान के अलावा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, बिहार व मध्य प्रदेश में इस गिरोह के नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। पूछताछ में सामने आया कि गिरोह से जुड़े लोग खून से प्लेटलेट्स निकालकर भी बेचते थे।
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एसटीएफ टीम के मुताबिक यह गिरोह खून से प्लेटलेट्स निकाल लेते थे। वहीं खून को दोगुना करने के लिए सेलाइन वाटर मिलाते हैं। इसकी जांच के लिए एसटीएफ ने स्वास्थ्य विभाग के साथ जांच शुरू कर दी है। एसटीएफ के अधिकारी के मुताबिक यह गिरोह खून जुटाने केलिए शिविर लगाता था, जो यूपी, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा व दिल्ली में आयोजित किए जाते थे। शिविरों में जुटाए गए रक्त में आधे से ज्यादा हिस्सा अपने पास रख लेते थे। फिर मांग के अनुसार उसे संबंधित ब्लड बैंक व प्रदेश में सप्लाई करते थे।
अस्पतालों में भी थी दखल
एसटीएफ के अधिकारी के मुताबिक यह गिरोह ब्लड बैंक ही नहीं बल्कि अस्पतालों के अंदर भी अच्छा दखल रखता था। जिसकी आपूर्ति के लिए मुंहमांगी कीमत वसूलते थे। गिरोह के सदस्यों ने पूछताछ में बताया कि दो से तीन गुना दाम पर खून बेचते थे। इनके एजेंट हर जिले में मौजूद हैं।
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एक साल पहले भी पकड़ा गया था गिरोह
एसटीएफ ने ही सुशांत गोल्फ सिटी इलाके से खून तस्करी गिरोह को सितंबर 2021 में पकड़ा था। इस गिरोह का सरगना मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में तैनात डॉ. अभय प्रताप सिंह था। एसटीएफ ने उसके साथ अभिषेक पाठक को गिरफ्तार किया था। डॉ. अभय प्रताप सिंह सरदार पटेल डेंटल कॉलेज रायबरेली रोड का रहने वाला है। वह वर्तामान में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर यूपी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल कॉलेज सैफई इटावा में तैनात है। वहीं अभिषेक पाठक सिद्धार्थनगर के जमुनी का रहने वाला है।
नामी अस्पतालों में करते थे आपूर्ति
एसटीएफ के मुताबिक सितंबर 2021 में पकड़े गए गिरोह ने कई अस्पतालों के नाम कुबूले थे। जहां मिलावटी व तस्करी कर लाए गए खून की सप्लाई करते थे। इसमें अवध हॉस्पिटल आलमबाग, वर्मा हॉस्पिटल काकोरी, काकोरी हॉस्पिटल, लखनऊ निदान ब्लड बैंक, बंथरा व मोहनलालगंज स्थित अस्पताल, सुषमा हॉस्पिटल के अलावा कई अन्य अस्पतालों के नाम शामिल हैं। इस गिरोह के अन्य सदस्यों में कमल सत्तू, दाताराम, हरियाणा का लितुदा, केडी कमाल, डॉ. अजहर राव, दिल्ली के नीलेश सिंह, हरियाणा व दिल्ली में मदद करते थे। इस गिरोह के नेटवर्क में लखनऊ के कई सदस्य शामिल थे।
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