लखनऊ जू में गुरुवार शाम एक और मादा काले हिरन ने दम तोड़ दिया। 13 वर्ष से अधिक आयु की ये बुजुर्ग मादा बीते दो दिन से बीमार चल रही थी और चिकित्सकों की निगरानी में थी।
लेकिन गुरुवार सुबह उसकी तबीयत और बिगड़ गई। 7 सितंबर से जू में शुरू हुए काले हिरनों की मौत के सिलसिले के बाद यहां अब तक 21 काले हिरनों की मौत हो चुकी है। अब बाड़े में महज 23 काले हिरन ही बचे हैं।
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जू के चिकित्सकों के मुताबिक बुजुर्ग मादा के दांत गिर चुके थे। इसके चलते वो भरपूर मात्रा में चरी नहीं उठा पा रही थी। शाम को चिकित्सकों ने उसका पोस्टमार्टम किया।
चिकित्सकों ने पोस्टमार्टम में मौत का कारण ‘रेस्पेरेटरी कार्डिएक अरेस्ट’ पाया है। अब काले हिरनों के बाड़े में 14 नर और 9 मादाएं ही बची हैं।
शाम को यहां काले हिरनों के बाड़े में थ्री-टियर सेनेटाइजेशन किया गया। इसके अलावा हिरनों की चरी में एंटी बॉयोटिक की मात्रा भी बढ़ाई गई है।
मौसम के बदलाव का असर तो नहीं!
बाड़े में उछलकूद कर रहे काले हिरनों के लिए बृहस्पतिवार का बदला हुआ मौसम भी मौत का कारण माना जा रहा है।
देहरादून से आए विशेषज्ञ डॉ. पराग के मुताबिक संक्रमण के चलते अंदरूनी रूप से कमजोर हुए काले हिरनों के लिए बदली और रिमझिम का मौसम ऊबन व घुटन भरा होता है।
23 सितंबर के बाद से हिरनों के लिए मौसम ठीक था। लेकिन गुरुवार सुबह से बदला मौसम उनके मुफीद नहीं था।