भाजपा ने यह तय कर लिया है कि आने वाले यूपी विधानसभा के चुनाव में वह दिल्ली मॉडल को न अपनाकर हरियाणा और महाराष्ट मॉडल को अपनाने जा रही है। यानी बीजेपी चुनाव के पहले अपना सीएम प्रत्याशी घोषित नहीं करेगी।
भाजपा 2017 की चुनावी तैयारियों के मूड में आ गई है। भाजपा ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की अगुवाई में कानपुर से चुनाव तैयारियों का बिगुल फूंक दिया है।
अमित शाह की अध्यक्षता में हुई महासंपर्क अभियान की समीक्षा बैठक में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा, उनकी विचारधारा और राष्ट्रीय अध्यक्ष की संगठनात्मक क्षमता के दम पर यूपी का विधानसभा चुनाव लड़ेगी।
मुख्यमंत्री पद के लिए कोई चेहरा आगे नहीं किया जाएगा। बैठक में यूपी भाजपा के प्रभारी ओम माथुर, प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी सहित आठ क्षेत्रों (ब्रज, काशी, कानपुर, बुंदेलखंड, पश्चिमी, अवध, बरेली और गोरखपुर) के पदाधिकारी, सभी जिलों के जिलाध्यक्ष, महामंत्री भी मौजूद रहे।
इन सबसे कह दिया गया है कि केंद्र सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाएं, ताकि यूपी फतह की भूमिका अभी से तैयार की जा सके। भाजपा ने विधानसभा की 250 सीटों को जीतने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह लखनऊ से सड़क मार्ग होते हुए दोपहर 12:30 बजे समीक्षा स्थल पहुंचे। समीक्षा के बाद ही राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय और राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी श्रीकांत शर्मा ने यूपी मिशन को लेकर भाजपा की मंशा साफ कर दी।
इन पदाधिकारियों ने मीडिया को बताया कि सपा सरकार की गुंडागर्दी को बेनकाब किया जाएगा। इसी सिलसिले में सांसदों (संयोजक अश्वनी चौबे, सदस्य मीनाक्षी लेखी, एमजे अकबर और अर्जुन मेघवाल) की एक कमेटी गठित की गई है। यह कमेटी जल्द ही बाराबंकी जाएगी, जहां महिला को थाने में जलाने और उसके साथ पुलिस के बर्बर बर्ताव की घटना हुई है।