विधानसभा का चुनावी समर जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है, भाजपा ने प्रदेश सरकार की घेराबंदी भी तेज कर दी है। भाजपा के रणनीतिकारों ने अब पूरी आक्रामकता के साथ प्रदेश सरकार पर हमला करने का फैसला किया है। इसके लिए भाजपा ने मथुरा से कैराना तक की घटनाओं को मुद्दा बनाने के साथ, बिसाहड़ा और कांठ की घटनाओं के सहारे सरकार को घेरने की तैयारी की है।
चार्जशीट के जरिए मौजूदा सरकार के समय हुए घपलों और जमीन पर कब्जों को उजागर करने के साथ केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश की मदद के लिए किए गए कामों की जानकारी भी देने की रणनीति बनी है। यह चार्जशीट सूबे के चुनावी समर के लिए निकलने वाली भाजपा की यात्राओं के दौरान लोगों को बांटी जाएगी।
यात्राओं को निकालने की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन इन्हें पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के आसपास सितंबर में शुरू करने की योजना है। भाजपा ने चार्जशीट के जरिए प्रदेश की जनता को यह भी बताने की रणनीति बनाई है कि विकास के मुद्दे पर सरकार किस तरह भ्रम फैला रही है।
उदाहरण के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव केंद्र सरकार पर असहयोग का आरोप लगाते हैं। सच यह है कि सपा के समर्थन से केंद्र में कांग्रेस नेतृत्व में चलने वाली मनमोहन सिंह सरकार ने 13वें वित्त आयोग में उत्तर प्रदेश को 2.80 लाख करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने का फैसला किया था जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने 14वें वित्त आयोग में प्रदेश को 7.10 लाख करोड़ रुपये देने का फैसला किया है।