चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक दलों को अति पिछड़ों की याद सताने लगी है।
सपा ने 17 पिछड़ी जातियों को दलितों का दर्जा दिलाने के लिए ‘अधिकार यात्रा’ और बाकी पिछड़ी जातियों को न्याय देने की घोषणा के साथ ‘सामाजिक न्याय यात्रा’ निकाली है।
ऐसे में कहीं वोट का गणित बिगड़ न जाए, इसे देखते हुए भाजपा भी इस मुकाबले में कूदने की तैयारी में जुट गई है।
पार्टी का सामाजिक न्याय मोर्चा इसके जवाब में जनजागरण अभियान चलाएगा। इसके लिए भाजपा शासन में 2001 में लागू की गई सामाजिक न्याय समिति की सिफारिशों की किताबों को झाड़ना-पोंछना शुरू हो गया है।
राजनीतिक समीक्षकों की मानें तो सपा की सामाजिक न्याय यात्रा हो या भाजपा की तरफ से शुरू किया जाने वाला जनजागरण अभियान।
दोनों का मकसद चुनाव में इन जातियों का वोट जुटाना है। अगर ऐसा न होता तो चुनाव के समय ही इन जातियों की याद न आती।
समीक्षकों के अनुसार, प्रदेश की 54 प्रतिशत पिछड़ी आबादी में लगभग 38 प्रतिशत अति पिछड़ी जातियों की आबादी है।
जाहिर है ये पिछड़ी जातियां जिस दल के साथ लामबंद हो जाएंगी, उसका राजनीतिक समीकरण काफी दुरुस्त हो सकता है।
इसलिए है बेकरारी
मौजूदा स्थिति के मद्देनजर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव भी अच्छी तरह समझ चुके होंगे कि विधानसभा चुनाव जैसा माहौल अब नहीं रहा है।
इसलिए लोकसभा चुनाव में अच्छे प्रदर्शन के लिए उन्हें कहीं न कहीं से वोटों का इंतजाम करना पड़ेगा। ऐसे में उनके सामने विकल्प अति पिछड़ी जातियां ही हैं।
हालांकि सपा अति पिछड़ी जातियों जैसी बात को खारिज करती है। भाजपा को भी पिछड़ों में अगर किसी के वोटों का सहारा है तो अति पिछड़ी जातियां ही हैं।
इसलिए वह लंबे समय से अति पिछड़ों को लामबंद करने की कोशिश में जुटी है। यह बात दीगर है कि पार्टी की आंतरिक उठा-पटक और खींचतान के चलते इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाया।
भाजपा की चिंता है कि सपा की यात्रा कहीं अति पिछड़ों को अपने पाले में खींच न ले, इसलिए उसने भी इस लड़ाई में कूदने का फैसला कर लिया है।
खोलेंगे पोल
भाजपा की प्रदेश मंत्री और पार्टी के सामाजिक न्याय मोर्चा की संरक्षक अनुपमा जायसवाल कहती हैं कि जिन्होंने अति पिछड़ों का सबसे ज्यादा नुकसान किया, वही अब वोट के चलते उनकी चिंता करने निकले हैं।
सपा मुखिया को ‘सामाजिक न्याय यात्रा’ निकालने से पहले इस सवाल का जवाब देना चाहिए कि राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में अति पिछड़ी जातियों का अलग-अलग आरक्षण कोटा निश्चित करने के लिए लागू की गई सामाजिक न्याय समिति की सिफारिशों को लागू न होने देने की साजिश किसके इशारे पर रची गई।
अशोक यादव ने किसके कहने पर इन सिफारिशों के खिलाफ याचिका दायर की।
जायसवाल कहती हैं कि भाजपा को मालूम है कि इस सवाल का जवाब सपा से नहीं मिलने वाला, इसलिए भाजपा सामाजिक न्याय मोर्चा जनता को सच्चाई बताने के लिए अभियान चलाएगा।
तथ्यों सहित यह सच्चाई रखेगा कि मुलायम की मिलीभगत से ही अशोक यादव ने याचिका दायर की थी।
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