वर्ष 2014 बीत गया। 2015 शुरू हो गया। साथ ही शुरू हो गई हैं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी की परीक्षाओं की उल्टी गिनती। इस साल उन्हें पार्टी की सदस्यता दो करोड़ तक पहुंचाने के साथ ही पंचायत चुनाव में भाजपा को सफलता दिलाने के इम्तिहानों से गुजरना है।
विधान परिषद की स्थानीय प्राधिकारी कोटे की अगले साल जनवरी में खाली हो रहीं 36 सीटों में भी ज्यादा से ज्यादा पर भाजपा का कब्जा कराकर अपनी रणनीति व नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाना है। साथ ही अपने चुनाव के इम्तिहान से भी गुजरना है।
बीते साल लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पहली बार अपने अकेले दम पर सूबे की 80 में से 71 सीटें जीतकर प्रदेश ही नहीं, देश की राजनीति में जबर्दस्त वापसी की। इसका श्रेय प्रदेश अध्यक्ष डॉ. वाजपेयी के खाते में भी गया। पर, उनकी असली परीक्षा तो अब होनी है।
पार्टी का सदस्यता अभियान चल रहा है। केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश भाजपा को सदस्यता 30 लाख से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ पहुंचाने का लक्ष्य दिया है, पर वाजपेयी ने इसे दो करोड़ पहुंचाने का ऐलान करके खुद अपनी तरफ से परीक्षा को और कठिन बना लिया है।