केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी का पराजित होने के बाद लगातार अमेठी का दौरा और अब केंद्र सरकार में दूसरे मंत्री मनोहर परिकर का अमेठी में ही बरौलिया गांव को गोद लेने की घोषणा भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के भावी इरादों को बताने के लिए पर्याप्त है।
भाजपा राहुल गांधी को पूरी तरह घेराबंदी करके ही नहीं रखना चाहती है, बल्कि अमेठी के जरिये पूरे उत्तर प्रदेश के लोगों को संदेश देना चाहती है कि भले ही किसी क्षेत्र से उसे अपेक्षित नतीजे न मिले हों लेकिन वह उनके विकास के लिए भी चिंतित है। साथ ही वह नरेंद्र मोदी द्वारा चुनाव में किए गए इस वादे पर कायम है कि विकास के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
हालांकि गौर करें तो बात सिर्फ इतनी भर नहीं है। इसके पीछे भाजपा के रणनीतिकारों की सोची-समझी रणनीति है। भगवा रणनीतिकार कांग्रेस के ट्रंप कार्डों को उनके घर में ही फंसाकर रखना चाहते हैं। साथ ही इस बड़े राजनीतिक घराने के आम लोगों से सरोकारों और क्षेत्र के विकास के दावों की पोल-पट्टी भी खोलना चाहते हैं।
लोगों के दिमाग में यह बात भी बैठा देना चाहते हैं कि सरोकारों की जमीन पर भाजपा के लोग कांग्रेस के इन नेताओं से कहीं भी पीछे नहीं हैं। राहुल की जगह अगर भाजपा के किसी व्यक्ति को मौका मिले तो भी इन क्षेत्रों का रुतबा ही नहीं बरकरार रहेगा बल्कि आज की तुलना में विकास भी ज्यादा होगा।