प्रदेश के अन्य जिलों के मजदूर भी अपना टिकट दिखा रहे हैं। लोग कह रहे है कि अगर ये रेल टिकट नहीं है तो क्या बंधक श्रमिकों को छोड़ने पर ली गई फिरौती की सरकारी रसीद है ? उन्होंने कहा कि संकट के समय मजदूर भावनात्मक रूप से अपने घर और घर वालों से दूरी महसूस कर रहे हैं।
उन्हें अपने गांव-घर में ही सुरक्षा की उम्मीद है। वे जहां निराश्रित और बेरोजगार होकर पड़े है, वहां से जल्दी से जल्दी निकलना चाहते है। संवेदनहीन सरकार इनकी पुकार कब सुनेगी?