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वरुण पर भड़के आदित्यनाथ, दिया करारा जवाब!

Sun, 10 May 2015 02:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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सुल्तानपुर के सांसद वरुण गांधी ने अपनी पांच साल की तनख्वाह गरीबों को देने का ऐलान किया था। फसल खराबी से खुदकुशी करने वाले पांच परिवारों को पांच महीने की तनख्वाह दे भी दी।
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उन्होंने कहा था, सभी सांसदों से पूछिएगा कि वे किसानों को अपनी जेब से क्या दे रहे हैं? यह सवाल वे अपने भाई राहुल गांधी से भी करवाना चाहते हैं। ‘अमर उजाला’ ने यह सवाल पहले उनकी ही पार्टी के सांसदों से कर लिया, जिस पर घमासान मच गया।

वरुण की बातों से भड़के गोरखपुर से भाजपा सांसद महंत आदित्यनाथ ने कहा कि डुगडुगी पीटकर मदद करना गरीबी का मजाक उड़ाना है। डुगुडुगी वही पीटते हैं जो कभी-कभार ही अपने इलाके में जाते हैं। जो बराबर अपने इलाके में रहते हैं वे न तो स्पर्धा करते हैं और न ऐसा सोचते हैं। ऐसी घोषणाएं भी नहीं करते।
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गरीबों की मदद करना और फिर उसे सार्वजनिक कर वाहवाही लूटना, मेरी नजर में मदद नहीं बल्कि गरीबी का मजाक उड़ाना है। हम लोग हमेशा क्षेत्र में रहते हैं। लोगों के सुख-दुख में शामिल होते रहते हैं।

यह मेरे यहां के गरीब और किसान ही बताएंगे कि उन्होंने दुख की घड़ी में मुझे अपने पास पाया या नहीं। मैंने जो किया वह मेरा कर्तव्य था। इसकी डुगडुगी पीटने की कोई जरूरत नहीं है।
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'वरुण बड़े आदमी, कॉरपोरेट घराने के हैं'

वहीं, अंबेडकरनगर से भाजपा सांसद हरिओम पांडेय ने कहा ‘वरुण बड़े आदमी हैं। कॉरपोरेट घराने के हैं। उन्हें बिना जमीनी हकीकत जाने किसी को नसीहत देने का काम नहीं करना चाहिए।

वे अपने इलाके में तो कभी जाते नहीं। पर जो जाते हैं, किसानों के हर दुख-सुख में शरीक होते हैं, उन्हें नसीहत देते हैं। वे अपने क्षेत्र में पहुंचे, यही अच्छी बात है।

मेरा क्षेत्र तो उनके संसदीय क्षेत्र से सटा है। यदि अपने पड़ोस वाले अंबेडकरनगर क्षेत्र के किसी व्यक्ति से पूछ लेते तो उन्हें पता चल जाता कि सत्र के दिनों को छोड़कर हरिओम किसानों के बीच में ही रहता है।’ वरुण ने सबसे पहले अंबेडकर नगर का ही नाम लिया था।

ऐलान करके मदद करना तो एहसान है
वरुण के बयान पर फैजाबाद से भाजपा सांसद लल्लू सिंह कहते हैं कि मैं किसी से अपनी तुलना नहीं करता। आप खुद ही देख लें कि फील्ड में कौन कितना रहता है। जो हमेशा फील्ड में रहता है, वह तो हमेशा ही किसी न किसी रूप में लोगों की जरूरत के अनुसार सेवा किया करता है।

मैं हमेशा अपने लोगों के बीच रहता हूं। इसलिए जो करता हूं, वह मेरे और उनके बीच का मामला है। मेरा कर्तव्य है। ऐलान करके किसी की मदद करना तो एहसान है। न मैं ऐलान करता हूं और न अपने क्षेत्र के लोगों पर एहसान करता हूं।
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