सहकारिता चुनाव के पहले चरण में भाजपा ने बढ़त बना ली है। मंगलवार को प्राथमिक सहकारी समितियों के निदेशक मंडल के चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किए गए। भाजपा के करीब बीस हजार से अधिक निदेशक निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। वहीं बड़ी संख्या में सपा के उम्मीदवार भी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।
प्रदेश में 15,702 प्राथमिक सहकारी समितियां हैं। इनमें से पहले चरण में करीब 7 हजार समितियों में चुनाव हो रहे हैं। मंगलवार को समितियों में निदेशक के करीब 70 हजार पदों पर चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किए गए। समितियों के चुनाव में भाजपा और सपा के बीच सीधा मुकाबला है। वहीं कुछ जगह निर्दलीय भी मजबूती से चुनाव लड़ रहे हैं। करीब 20 हजार से अधिक निदेशकों के पद पर केवल भाजपा के उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया। नामांकन पत्रों की जांच बुधवार को होगी।
16 मार्च को नामांकन वापसी का समय बीतने के बाद निर्विरोध निर्वाचित प्रत्याशियों की घोषणा की जाएगी। जिन समितियों में निदेशक पद के लिए एक से अधिक उम्मीदार होंगे वहां पर 18 मार्च को चुनाव होगा। 19 मार्च को समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव होंगे। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं सहकारिता चुनाव के प्रभारी ब्रज बहादुर उपाध्याय का दावा है कि करीब 50 फीसदी से अधिक निदेशक पदों पर भाजपा उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित होंगे।
प्राथमिक सहकारी समितियों के चुनाव
भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व यूपी में सहकारिता को बढ़ावा देकर ग्रामीण इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। सहकारिता चुनाव पर राष्ट्रीय नेतृत्व और खासतौर पर केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की खास नजर है। यही वजह है कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी, प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह, सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर खुद चुनाव की खुद निगरानी कर रहे हैं। प्रदेश मुख्यालय में सहकारिता चुनाव के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है। मंगलवार को कंट्रोल रूम से पूरे प्रदेश में प्राथमिक सहकारी समितियों के चुनाव पर नजर रखी गई। देर रात तक डाटा संकलित किया गया।