यूपी की 80 सीटों को जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही भाजपा इस बार के चुनाव में एक और 'हिडन एजेंडे' को साधने में जुटी है। यह एजेंडा है सैफई परिवार के उम्मीदवारों को उनके गढ़ में मात देने का। भाजपा ने जिस तरह की व्यूहरचना तैयार की है, उससे सपा के सामने चुनौती कड़ी हो सकती है।
दरअसल, भाजपा की इस योजना के पीछे 2019 के लोकसभा चुनाव परिणाम हैं, जिसमें सैफई परिवार के लिए सुरक्षित मानी जाने वाली पांच सीटों में से तीन पर भाजपा ने सपा के तिलिस्म को तोड़ते हुए कब्जा जमा लिया था।
मुलायम सिंह अपनी परंपरागत सीट मैनपुरी से तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव आजमगढ़ से चुनाव मैदान में थे। इनके अलावा डिंपल यादव कन्नौज से तो अक्षय यादव फिरोजाबाद और धर्मेंद्र यादव बदायूं से प्रत्याशी थे। लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी सिर्फ पिता-पुत्र यानी मुलायम और अखिलेश ही अपनी सीट बचा पाए थे।
जबकि डिंपल, अक्षय और धर्मेंद्र को भाजपा से मात खानी पड़ी थी। हालांकि मुलायम सिंह के निधन के बाद मैनपुरी में हुए उपचुनाव में सपा ने डिंपल को मैदान में उतारकर सीट बचा ली थी, जबकि अखिलेश के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई आजमगढ़ सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने इस सीट को भी सपा से छीन लिया था।
पीएम और सीएम के भी लगाए गए हैं कार्यक्रम
भाजपा के व्यूहरचना के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गृहमंत्री अमित शाह के कई कार्यक्रम लगे हैं। मुख्यमंत्री ने तो इसकी शुरुआत भी कर दी है। सीएम अब तक बदायूं, मैनपुरी, फिरोजाबाद में दो से तीन सभाएं कर चुके हैं। इनके अलावा दोनों उप मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, महामंत्री संगठन धर्मपाल समेत समेत प्रदेश सरकार के करीव सभी मंत्री और पदाधिकारियों के कार्यक्रम हो चुके हैं।
मप्र के सीएम मोहन यादव को भी उतारा
माना जा रहा है कि इसी व्यूहरचना के तहत पार्टी ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को भी सपा के गढ़ में उताकर संदेश देने की कोशिश की है। इसके तहत ही मैनपुरी सीट पर भाजपा प्रत्याशी के नामांकन में मोहन यादव को बुलाया गया था।