... बाहर निकलो, देखते हैं
मनकामेश्वर वार्ड से भाजपा पार्षद रंजीत यादव महापौर के खास माने जाते हैं। एक साल पहले नगर निगम सदन में रामकी कंपनी को लेकर भाजपा पार्षद रामनरेश रावत के एक बयान पर रंजीत यादव से उनकी भिड़ंत हो गई थी। रामनरेश और महापौर के बीच भी मनमुटाव था, लेकिन इधर कुछ महीनों से वह महापौर के खास हो गए हैं। वहीं पार्षद शैलेंद्र वर्मा, मुकेश सिंह मोंटी जो पहले खास थे, अब महापौर से दूर हो गए हैं। यह बात बैठक में पार्षद शैलेंद्र और पूर्व पार्षद हरीश ने उठाई तो पार्षद रंजीत भड़क गए। बात इतनी बढ़ी कि दोनों ओर बाहर निकलने पर देख लेने की चेतावनी दी गई। बैठक में किसी बात पर कोई सहमति नहीं बन सकी।
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दोनों पक्षों ने ये भी कहा
भाजपा पार्षद रंजीत यादव ने बैठक के बाद कहा कि हरीश कुछ व्यक्तिगत आक्षेप कर रहे थे तब मैंने यह कहा कि बाहर निकलना तब कर लेना। बाहर निकलो, देखते हैं... जैसी बात मैंने नहीं कही। इधर, पूर्व पार्षद हरीश अवस्थी ने कहा कि वह बस इतना कहेंगे कि रंजीत ने अभी दुनिया नहीं देखी है।
नगर अध्यक्ष भाजपा आनंद द्विवेदी ने कहा कि झगड़े की कोई बात नहीं हैं। पार्षद परिवार के बीच बैठे थे। आपस में कभी कोई तेज आवाज में बात हो जाती है तो इसका मतलब झगड़ा नहीं है।
सिर्फ सड़क-नाली पर ही क्यों खर्च हो बजट : महापौर
महापौर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि पार्षद सिर्फ सड़क-नाली पर ही पूरा कोटा क्यों खर्च करना चाहते हैं? शहर में पार्क, स्ट्रीट लाइट, फॉगिंग आदि के कार्य भी जरूरी हैं, वह भी कराए जाएं। 15 वार्ड ऐसे हैं, जहां अच्छे पार्क नहीं हैं। इन पर भी बजट खर्च हो। पार्षद कोटे में जिस काम के जो धनराशि तय है, उसी पर खर्च किया जाना चाहिए। बैठक में दो पार्षदों के बीच कुछ विवाद हुआ है, लेकिन सब सामान्य है।