राज्यसभा चुनाव की तरह विधान परिषद की 12 सीटों के लिए होने जा रहे चुनाव में भी सियासी दांव-पेंच का खेल देखने को मिल सकता है। अब तक शांत दिख रहे चुनावी माहौल में बृहस्पतिवार को भाजपा के दो नामांकन पत्र और खरीदवाने से हलचल बढ़ गई है। जिस तरह भाजपा ने पहले 10 नामांकन पत्र खरीदने के बाद दो और मंगवाए हैं उससे माना जा रहा है कि उसकी तरफ से 11 उम्मीदवार उतारे जा सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो चुनाव की नौबत आएगी और वोट की गणित रोमांचक चुनावी तस्वीर बनाएगी।
दरअसल, अब तक भाजपा के 10 और सपा के दो नामांकन पत्र खरीदने से यह माना जा रहा था कि विधान सभा चुनाव से ठीक पहले का वर्ष होने से शायद कोई पार्टी चुनाव की नौबत नहीं आने देना चाहेगी। इसलिए चुनाव निर्विरोध हो जाएगा। पर भाजपा की तरफ से दो और नामांकन पत्र खरीदने की जानकारी सामने आई तो इसके निहितार्थ तलाशे जाने लगे। माना जा रहा है कि भाजपा इस कोशिश में लग गई है कि सपा के दो उम्मीदवारों को उच्च सदन में आसानी से न पहुंचने दिया जाए। अब सपा की तरफ से भाजपा की इस रणनीति का जवाब कैसे दिया जाएगा, यह आगे पता चलेगा।
सियासी दलों में हो सकती है तोड़फोड़
भाजपा अगर 11 उम्मीदवार उतारती है और सारे नामांकन पत्र दुरुस्त पाए जाते हैं तो चुनाव होना तय है। ऐसी परिस्थिति में प्रदेश में राजनीतिक दलों में तोड़फोड़ होना तय है। किस दल का कौन विधायक टूटकर किधर जाएगा और कौन किसको शह देगा या किसे मात मिलेगी, यह तो समय बताएगा, लेकिन मतदान की परिस्थिति प्रदेश में राजनीतिक दलबदल की नई कहानी जरूर लिखेगी। साथ ही भविष्य की राजनीति की दिशा और दशा का संकेत भी देगी।