सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि संविधान की प्रस्तावना में सभी के लिए न्याय, स्वतंत्रता और समानता की गारंटी है। पंथनिरपेक्षता व समाजवाद के लिए प्रतिबद्धता है। लेकिन, भाजपा सरकार ने संविधान की मूल आत्मा पर ही आघात करने का काम किया है। उसे समाजवाद से चिढ़ है। उसकी नीयत समाज को बांटने व नफरत का जहर फैलाने की है। भाजपा ने लोकतांत्रिक मूल्यों व संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर किया है।
अखिलेश यादव ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर अपने बयान में कहा कि भारत के संविधान की प्रस्तावना देश को संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने के लिए लिखी गई थी। भाजपा ने सामाजिक और आर्थिक न्याय के सिद्धांतों की अवहेलना के साथ लोगों को संविधान प्रदत्त अधिकारों से वंचित करने की ठान ली है। व्यक्ति को गरिमा के साथ जीने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अवमूल्यन किया जा रहा है।
भाजपा के रहते स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्य सुरक्षित नहीं रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश को लंबे संघर्षों के बाद आजादी मिली है। हजारों लोगों ने इसके लिए कुर्बानियां दी हैं। जंगे और आजादी और स्वतंत्रता के बाद समाजवादियों ने दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं, छात्रों-नौजवानों को अधिकार दिलाने के लिए निरंतर आवाज बुलंद की है। भारत के संविधान के अनुसार देश के हर व्यक्ति को गरिमा व सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है।
सपा अध्यक्ष ने कहा, भारतीय गणतंत्र की 69 सालों की विकास यात्रा में दुनिया कई देशों से भारत की तुलना करने पर हम आज भी पीछे हैं। किसान हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्हें खुशहाल बनाने का काम नहीं हुआ। नौजवान बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं। गरीब-अमीर की खाई लगातार बढ़ती जा रही है। संविधान की प्रस्तावना व्यक्ति और राष्ट्र की एकता-अखंडता की गरिमा को बनाए रखने के लिए भाईचारे पर बल देती है। उन्होंने कहा, केंद्र की सत्ता में बैठी भाजपा सरकार गरीबों पर कहर ढहा रही है। बड़े पूंजीघरानों के कर्ज माफ किए जा रहे हैं। जनता का जमा धन कर्ज में लेकर तमाम उद्योगपति विदेश पलायन कर गए हैं। कालाधन वापस आया नहीं। अपने देश का धन भी बाहर चला गया। युवा पीढ़ी बेरोजगारी से कराह रही है। भाजपा सरकार हर मोर्चे पर नाकाम है। देश के लोग भाजपा की विदाई चाहते है।