जिला आर्य प्रतिनिधि सभा ने वाल्मीकि जयंती पर किया यज्ञ। स्वयं
लखनऊ। भारतीय संस्कृति के आधार महाकाव्य रामायण के रचयिता आदि कवि महर्षि वाल्मीकि की जयंती मंगलवार को राजधानी में आस्था के साथ मनाई गई। हवन, पूजन और यज्ञ के साथ ही निर्धन कन्याओं के विवाह जैसे आयोजन हुए। वक्ताओं ने ऋषि वाल्मीकि को भारतीय सनातन परंपरा का प्रणेता बताया।
जिला आर्य प्रतिनिधि सभा और राष्ट्र कल्याण मंच के संयुक्त तत्वावधान में एक वृहद यज्ञ का आयोजन विधानसभा मार्ग पर स्थित मलिन बस्ती में किया गया। वेद्राचार्य डॉ. निष्ठा विद्यालंकार ने यजमान अंशुमान रस्तोगी की मौजूदगी में यज्ञ संपन्न कराया। यज्ञ के उपरान्त जिला सभा की अध्यक्ष डॉ. निष्ठा विद्यालंकार ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का जीवन अच्छा संसर्ग पाकर उन्हें शिखर तक ले गया और वे आदिकवि के रूप में विख्यात हुए। उन्होंने बताया कि आर्यसमाज दलितोद्धारक तथा अछूतोद्धारक है। इसी परिप्रेक्ष्य में जिला सभा की ओर से घर-घर यज्ञ, हर घर यज्ञ का आयोजन कर रही है।
आचार्य विमल आर्य ने कहा कि जैसे वायु सबके लिए है, सूर्य सबके लिए है, वैसे ही वेद का ज्ञान सभी वर्णों के कल्याण के लिए है। उर्मिला आर्या ने भजन प्रस्तुत किए। इस दौरान जिला सभा मंत्री सुमन पांडेय, कांति कुमार, रुद्र स्वरूप, सतीश निझावन, मानसिंह, वंदना रस्तोगी, सुनीता और शोभा आर्या आदि की मौजूदगी रही।