पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी।
- फोटो : amar ujala
पूर्व विधायक तुलसीदास राय चंदानी कहते हैं कि बात वर्ष 1962 के चुनाव की है। संसदीय सीट बलरामपुर से चुनाव हारने के बाद गोंडा शहर के पीपल तिराहे के पास अटल बिहारी वाजपेयी के आवास के सामने लोगों की भीड़ एकत्र थी। बहुत से कार्यकर्ता निराश थे। हर कोई मुंह लटका कर बैठा था। तभी अटल जी कमरे से बाहर निकले। कहा कि क्यों निराश हो, मुंह मत लटकाओ। फिर लड़ेंगे और जीतेंगे। इस तरह से अटल जी ने कार्यकर्ताओं में जोश भरा।इसके बाद वह वर्ष 1967 में वह वहीं से चुनाव जीते भी। पूर्व विधायक कहते हैं कि अटल जी की यादें ही उनकी पूंजी है। बताया कि 1962 व 1967 के चुनाव में बलरामपुर में गैसड़ी, हरैया व पचपेड़वा में कैंप करके उन्होंने अटल जी के चुनाव की कमान संभाली थी। उस वक्त गांव-गांव भ्रमण किया। आज भी वह पल याद है, यही जीवन की सबसे बड़ी धरोहर है।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी।
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पूर्व सांसद स्वर्गीय सत्यदेव सिंह की बेटी व लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय प्रबंध समिति की उपाध्यक्ष वर्षा सिंह ने बताया कि जब भी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी गोंडा आते थे, उनके आवास पर जरूर आते थे। पिताजी से राजनीतिक मुद्दों पर उनकी लंबी बातचीत होती थी। वह कमरे में तख्त पर बैठते थे। स्थानीय लोगों से संवाद करते थे। बताया कि मम्मी स्वर्गीय सरोज रानी सिंह से वह मनपसंद खाने की फरमाइश करते थे। काला नमक चावल उन्हें बहुत पसंद था। बाटी चोखा भी अटल जी को पसंद था। वह बड़े गिलास में दूध पीते थे, उसे वह गिलास देवता कहते थे। बताया कि मिठाई के वह काफी शौकीन थे। कई बार बलरामपुर से मुंशियाइन का पेठा पापा ने उनके लिए मंगवाया। बताया कि अटल जी की यादें आज भी जेहन में है।