अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय विधेयक गुरुवार को विधानमंडल के दोनों सदनों में पास हो गया। यह विश्वविद्यालय राजधानी के रहमानखेड़ा में स्थापित किया जाएगा। प्रदेश भर के सभी सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेज इस विवि से संबद्ध होंगे। बाद में यहां चिकित्सा सुविधा के साथ-साथ मेडिकल की पढ़ाई भी होगी।
सरकार की ओर से अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय विधेयक 2018 बृहस्पतिवार को विधानसभा व विधान परिषद में पेश किया गया। विधानसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान बसपा के लालजी वर्मा ने जानना चाहा कि क्या यह सिर्फ संबद्ध विवि होगा या इसमें पढ़ाई व चिकित्सा की सुविधा भी होगी?
चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने कहा कि इस विवि से सभी सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेज, पैरा मेडिकल कॉलेज व नर्सिंग कॉलेज संबद्ध होंगे। ज्यादातर प्रदेशों में इस तरह के विवि हैं।
इससे मेडिकल कॉलेजों की पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ पारदर्शिता भी आएगी। उन्होंने लोहिया संस्थान का जिक्र करते हुए कहा कि कुलपति व कुलाधिपति को लेकर शंका की जरूरत नहीं है। संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि ज्यादातर विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति राज्यपाल हैं। हम इसे राजनीति से अलग रखना चाहते हैं।
सपा के आनंद भदौरिया ने कहा कि विवि को अगर बुंदेलखंड में स्थापित किया जाए तो अधिक लोगों को लाभ पहुंचेगा, क्योंकि लखनऊ में पहले से एसजीपीजीआई, केजीएमयू और लोहिया इंस्टीट्यूट हैं। इस पर नेता सदन दिनेश शर्मा ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विवि संबद्धीकरण के लिए होगा।
...तो गैरराजनीतिक कहां रह गए राज्यपाल
सुरेश खन्ना ने अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विवि को राजनीति से अलग रखते हुए राज्यपाल को ही कुलाधिपति बनाए जाने पर बल दिया तो बसपा के लालजी वर्मा ने कहा, राज्यपाल एक पार्टी के पदाधिकारियों को दावत देते हैं तो गैरराजनीतिक कहां रह गए? हम चाहते हैं कि इसमें राज्य सरकार का हस्तक्षेप रहे। राजनीति से ऊपर क्या हो सकता है। राजनीतिक व्यक्ति को हमेशा समाज व जनता का डर रहता है।