लखनऊ। मड़ियांव पुलिस ने लापरवाही की सारी हदें पार कर दीं। बाइक चोरी का एक केस दर्ज करने के लिए पीड़ित शिक्षक को करीब तीस बार थाने-चौकी के चक्कर लगवाए। जब शिक्षक ने अफसरों से शिकायत करने की बात कही तब घटना के 45 दिन बाद एफआईआर दर्ज की। कमिश्नरेट पुलिस की लचर कार्यशैली का इससे अंदाजा लगाया जा सकता है।
गोसाईंगंज निवासी दिनेश कुमार मड़ियांव के गायत्री नगर नौबस्ता खुर्द इलाके में किराए के मकान में रहते हैं। वह प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक हैं। दिनेश के मुताबिक 27 मार्च की शाम को घर के बाहर खड़ी उनकी बाइक चोरी हो गई थी।
वह उसी दिन पुलिस के पास पहुंचकर तहरीर दी थी। दिनेश के मुताबिक पुलिसकर्मियों ने कहा था कि बाद में आकर एफआईआर कॉपी रिसीव कर लें। दिनेश लौट गए थे।
इसके बाद दिनेश चौकी व थाने के चक्कर लगाते रहे, हर बार उनको आश्वासन दिया जाता रहा कि केस दर्ज कर लिया जाएगा, लेकिन नहीं किया। सात मई को जब वह गए तो उन्होंने थाने के पुलिसकर्मियों से कहा कि वह इस संबंध में अब उच्चाधिकारियों से शिकायत करेंगे। तब दूसरे ही दिन केस दर्ज किया।
मड़ियांव इलाके में भी हुई थी चेन लूट
पांच मई की रात को अलीगंज में महिला से पर्स लूट का प्रयास हुआ था। जिसमें महिला व उसका मासूम बेटा घायल हो गया था। इस घटना से करीब एक घंटे पहले मड़ियांव में किरन नाम की महिला से चेन लूट हुई थी। इसमें भी वही लुटेरा शामिल था। ऐसे में स्पष्ट है कि मड़ियांव पुलिस चोरी लूट की घटनाओं पर भी अंकुश नहीं लगा पा रही है और रिपोर्ट दर्ज करने में भी हीलाहवाली कर रही है। डीसीपी नॉर्थ एसएम कासिम आब्दी ने बताया कि प्रकरण की अभी जानकारी नहीं है। जानकारी कर जांच कराई जाएगी। अगर लापरवाही बरती गई होगी तो संबंधित पुलिसकर्मी पर कार्रवाई की जाएगी।
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