आकाश आनंद इस बार वहां पूरा चुनाव देख रहे हैं।
बिहार चुनाव में बहुजन समाज पार्टी का हाथी सधे कदमों से आगे बढ़ रहा है। पार्टी बिहार में कुछ खोने की स्थिति में नहीं है, जिसे ध्यान में रखकर चुनाव के जरिये संगठन को मजबूत किया जा रहा है। खासकर पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद ने बिहार में अपनी परिपक्वता का परिचय दिया है। वह अपनी जनसभाओं में विपक्ष के किसी भी बड़े नेता पर सीधा निशाना साधने के बजाय विभिन्न वर्गों को बसपा के पक्ष में एकजुट करने की कवायद कर अपनी राजनीतिक परिपक्वता का परिचय दे रहे हैं।
जानकारों की मानें तो बसपा भले ही बिहार में सरकार बनाने का दावा कर रही हो, लेकिन उसकी कोशिश करीब आधा दर्जन सीटों पर जीत हासिल करने की है। यही वजह है कि पार्टी ने बिहार में प्रत्याशियों के चयन में अपने पुराने सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले को अपनाने के साथ पुराने प्रत्याशियों और लोकप्रिय चेहरों को चुना है। आकाश आनंद जहां बिहार में ताबड़तोड़ जनसभाएं कर पार्टी के लिए वोट जुटा रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर बसपा अध्यक्ष मायावती के मुस्लिम कार्ड का असर भी बिहार चुनाव में देखने को मिल सकता है।
जिस तरह मायावती ने मुस्लिम समाज का खुलकर समर्थन किया है, उसकी गूंज बिहार तक भी पहुंची है। पार्टी पदाधिकारी बिहार चुनाव के दौरान इसका प्रचार भी कर रहे हैं कि मुस्लिमों का हित केवल बसपा में ही सुरक्षित है। यदि बसपा का यह कार्ड बिहार में सफल रहा तो राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस को नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।