आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक जांच में पता चला कि श्रावस्ती, बहराइच, बलरामपुर, सिद्वार्थनगर आदि नेपाल के सीमावर्ती जिलों के कई गांवों में मुस्लिम आबादी बढ़ती जा रही है, जबकि हिंदुओं की आबादी कम हुई है। इससे आशंका जताई जा रही है कि बेहद सुनियोजित तरीके से मुस्लिम समुदाय के लोगों को सीमावर्ती इलाकों में बसाया जा रहा है। यह कृत्य करीब 15 साल से जारी होने की वजह से इन इलाकों की डेमोग्राफी में भी बदलाव देखा गया है। बता दें कि आयकर विभाग ने रक्सौल, रुपैडीहा, बढ़नी, कोयलाबासे आदि सीमावर्ती इलाकों में छापे मारे थे।
आयकर विभाग की रिपोर्ट मिलने के बाद गृह मंत्रालय सतर्क हो गया, जिसके बाद दिल्ली से आए अधिकारियों ने आईबी के अफसरों के इन सीमावर्ती इलाकों का दौरा किया था। जिसके बाद यूपी सरकार को पूरे मामले की जानकारी दी गई और अवैध तरीके से बनाई गई मस्जिदों, मदरसों और मजारों को नेस्तनाबूद किया जाने लगा। वहीं दूसरी ओर इस फंडिंग के दृष्टिगत ईडी को भी कार्रवाई करने को कहा गया है। दक्षिण भारत में आयकर विभाग भी संदेह के दायरे में आईं संस्थाओं की जांच कर रही हैं।
सूत्रों की मानें तो इस रिपोर्ट के बाद ही बलरामपुर में छांगुर और उसके करीबियों पर कानूनी शिकंजा कसना शुरू किया गया। बता दें कि छांगुर के खिलाफ जांच करीब डेढ़ वर्ष पहले शुरू हुई थी, जिसका मुकदमा भी नवंबर 2024 में दर्ज किया गया था। इसके बावजूद करीब आठ महीने तक एटीएस ने छांगुर के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की। माना जा रहा है कि गृह मंत्रालय के दखल के बाद छांगुर समेत ऐसे सभी राष्ट्रविरोधी तत्वों पर कार्रवाई शुरू की गई है।