प्रदेश सरकार ने ग्राम सभा की आरक्षित श्रेणी की भूमि के पुनग्रर्हण, श्रेणी परिवर्तन व विनिमय की अपनी शक्तियां जिलाधिकारियों व मंडलायुक्तों को हस्तांतरित करने का फैसला किया है। इससे विकास से जुड़े सरकारी प्रोजेक्ट के लिए जमीन की व्यवस्था में तेजी आएगी।
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सरकार ने कैबिनेट बाई सर्कुलेशन यह निर्णय किया है। ग्राम सभा की अनारक्षित श्रेणी में नवीन परती, बंजर व ऊसर जमीन का पुनग्रर्हण यदि प्रदेश सरकार के सेवारत विभाग के लिए किया जाना है तो यह अधिकार पहले ही जिलाधिकारी को सौंपा जा चुका है।
अब सेवारत विभागों के लिए यदि सुरक्षित श्रेणी के चारागाह, कब्रिस्तान, खलिहान, चकरोड़, तालाब व आबादी स्थल के पुनग्रर्हण की भी जरूरत होगी तो यह कार्रवाई भी जिलाधिकारी करेंगे। सरकार ने अपना यह अधिकार भी डीएम को हस्तांतरित कर दिया है।
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इसी तरह, ग्राम सभा की अनारक्षित श्रेणी में नवीन परती, बंजर व ऊसर जमीन का पुनग्रर्हण यदि राज्य सरकार के वाणिज्यिक विभागों व केंद्र सरकार के विभागों के लिए किया जाना है तो 40 लाख मूल्य तक जिलाधिकारी व 40 लाख से अधिक मूल्य के लिए कमिश्नर को पहले ही अधिकृत किया जा चुका है।
अब यदि आरक्षित श्रेणी के चारागाह, कब्रिस्तान, खलिहान, चकरोड, तालाब व आबादी स्थल आदि के पुनग्रर्हण की जरूरत होगी तो 40 लाख मूल्य तक जिलाधिकारी और 40 लाख से अधिक मूल्य का मंडलायुक्त करेंगे। सरकार ने प्रदेश सरकार के वाणिज्यिक विभागों व केंद्र सरकार के विभागों के लिए आरक्षित श्रेणी की भूमि के पुनग्रर्हण का अपना अधिकार भी हस्तांरति कर दिया है।
आरक्षित श्रेणी की भूमि के श्रेणी परिवर्तन व विनियम की शक्ति भी इसी मूल्य के हिसाब से जिलाधिकारियों व मंडलायुक्तों को दे दी गई है।
एक्सप्रेस-वे, फ्रेट कॉरिडोर, स्कूल, मेडिकल कालेज के लिए जमीन व्यवस्था होगी आसान
वर्तमान में केंद्र सरकार के राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे तथा प्रदेश सरकार के पूर्वांचल एक्सेप्रस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे आदि के साथ केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न परियोजनाओं का कार्य चल रहा है।
इन परियोजनाओं के बीच में ग्राम सभा के करीब 1000 से अधिक भूखंड पड़ रहे हैं। इनका पुनग्रर्हण, श्रेणी परिवर्तन या विनिमय आदि किया जाना है। इतनी बड़ी संख्या में ऐसे प्रस्तावों का निस्तारण एक ही स्थान से शासन स्तर से होने में काफी समय लगने की संभावना है।
लोकहित की परियोजनाओं के लिए समय से भूमि उपलब्ध न होने से उनके पूरा होने में देरी की संभावना है। इस निर्णय से एक्सप्रेस-वे, फ्रेट कॉरिडोर व राष्ट्रीय राजमार्ग के अलावा राजकीय मेडिकल कालेजों की स्थापना, राजकीय कार्यालयों, विद्युत उपकेंद्रों, राजकीय महाविद्यालयों, इंटर कालेजों, केंद्रीय विद्यालयों व नवोद विद्यालय जैसे जनहित की सरकारी परियोजनाओं के लिए तेजी से भूमि उपलब्ध कराई जा सकेगी।