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भातखंडे संगीत संस्थान अभिमत विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने किया आह्वान-प्रदेश की संगीत परंपरा प्राचीन, उसे सहेजें

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भातखंडे संगीत संस्थान के दशम दीक्षांत समारोह में प्रस्तुति देते कलाकार।
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लखनऊ। भारतीय संस्कृति में ज्ञान, विज्ञान, कला और संगीत की अमूल्य विरासत समाई है, जिसमें शिक्षा की बड़ी भूमिका है। शिक्षा व्यक्ति को संस्कारित करती है। नैतिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक प्रवृत्तियों का उचित समावेश करती है। भावी जीवन को समुन्नत एवं समृद्ध करती है। संगीत एक साधना है। उत्तर प्रदेश की संगीत परंपरा न केवल प्राचीनतम है, सबसे अधिक समृद्ध है। यहां शास्त्रीय और भक्ति संगीत के साथ ही लोक संगीत का प्रचुर खजाना मौजूद है। हमें अपने पूर्वजों से मिली सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए काम करना चाहिए। नई पीढ़ी के मन में भारतीय संस्कृति, संगीत, कला के प्रति सम्मान पैदा हो, इसका प्रयास करना चाहिए। ये बातें सोमवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भातखंडे संगीत संस्थान अभिमत विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षांत समारोह में कहीं।
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समारोह में राज्यपाल ने 72 परास्नातक, 44 स्नातक समेत कुल 123 डिग्रियां छात्रों को प्रदान की। मेधावियों को 44 पदक दिए गए। इनमें 24 पदक महिलाओं के खाते में गए। सबसे ज्यादा 6 मेडल उसमीत सिंह को गायन में मिले। एक को मरणोपरांत समेत 6 को पीएचडी उपाधि दी गई। इस मौके पर राज्यपाल ने संस्थान की स्मारिका का विमोचन भी किया। स्कूली बच्चों को बैग, पुस्तक, फल भी बांटे। नई शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपने विद्यार्थियों का समय-समय पर चिकित्सीय परीक्षण जरूर कराना चाहिए। विशेष रूप से बालिकाओं का रक्त परीक्षण जरूरी है, वे खून की कमी से जूझती हैं। इसका असर उनके आगे के जीवन पर पड़ता है।
संगीत साधक अपना लक्ष्य न भूलें
मुख्य अतिथि रहे संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष वादन आचार्य पद्मश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य ने कहा कि संगीत छात्रों का चाहिये कि वे खुद को संगीत को सौंप दें, संगीत उन्हें दुनिया जहान तक पहुंचा देगा। उन्होंने छात्रों को जीवन की सीख देते हुए कहा कि मंच प्रदर्शन के दौरान एक कलाकार, संगीत साधक का लक्ष्य क्या है ये नहीं भूलना चाहिए। इस अवसर पर भातखंडे के कुलपति एवं लखनऊ मंडलायुक्त रंजन कुमार समेत तमाम शिक्षक मौजूद रहे।
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नहीं पहुंच सके श्रीलंका के संगीत छात्र, अयोध्या के उसमीत को 6 पदक
समारोह में सबसे ज्यादा 6 गोल्ड मेडल गायन में अयोध्या के उसमीत सिंह को दिए गए। सारंगी वादन विद्या में एसएम आईसी सूर्यनायिका को तीन, आईडी रुवानी मधुमानिका को दो पदक दिए गए, लेकिन दोनों ही आयोजन में नहीं जुट सके। कथक में अनुपम सिंह को तीन, ज्योति सिंह, प्रिया सैनी, कृति सिंह, आम्रपाली गुप्ता, रमनदीप सिंह को दो-दो गोल्ड मेडल मिले। श्रुति श्रीवास्तव को एक स्वर्ण पदक मिला।
वाद्यवृंद और कथक ने किया मुग्ध
लखनऊ। दीक्षांत समारोह के बाद संगीत छात्रों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समां बांधा। ढोलक, सितार, तबला, बांसुरी और वायलिन पर डॉ. कमलेश दुबे के निर्देशन में तैयार वाद्यवृंद में आठ ने सितार पर, संजरी साहू समेत 4 ने वायलिन पर, तबले और हवाईन गिटार पर संगीत सरिता बहाई कि 10 मिनट से अधिक समय तक सब टकटकी लगाए देखते रहे। वाद्यवृंद के बाद मंच पर उतरी गोल्ड मेडलिस्ट कथक छात्रा प्रिया सैनी के भावों ने मुग्ध किया। लक्ष्मी ताल 18 मात्रा में शुद्ध कथक प्रस्तुति के बाद राम स्तुति की। प्रगति ने भरतनाट्यम पर प्रस्तुति दी। तेलगु रचना पर नृत्य के बाद शिव स्तुति से भगवान शिव की आराधना की। आदर्श कुमार मिश्र ने गायन में राग जोग स्वरन के साधे... सुनाया। समूह गायन में राग बसंत और राग खमाज में ठुमरी सखी सांवरे... पर प्रस्तुति दी। डॉ. मीरा दीक्षित के निर्देशन में नृत्य और गायन के छात्रों समेत लगभग 20 लोगों ने मंच पर राग बसंत नृत्य नाटिका की प्रस्तुति दी।
नई शिक्षा नीति पर अगले महीने कुलपतियों की बड़ी बैठक
समारोह के दौरान मंच से राज्यपाल ने कहा कि नई शिक्षा नीति को लेकर छात्रों के साथ ही विश्वविद्यालय प्रबंधन को गंभीरता दिखानी होगी। केंद्र और राज्य से 70-30 के अनुपात के पाठ्यक्रम रहेगा। ऐसे में हम छात्रों को और बेहतर क्या दे सकते हैं, इस पर तैयारी करनी होगी। इसको लेकर अगले महीने प्रदेश के सभी कुलपतियों के साथ बैठक कर प्रस्तावों और सुझावों पर चर्चा होनी है।

भातखंडे संगीत संस्थान के दशम दीक्षांत समारोह में मेडल व उपाधि के साथ छात्र छात्राएं।

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