लखनऊ। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विवि में स्थापित इन्क्यूबेशन सेंटर पर जहां स्टार्टअप्स को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी थी, वहां लापरवाही और समय पर प्रोत्साहन व मार्गदर्शन न मिलने के कारण छात्रों के 12 स्टार्टअप शुरू होकर भी बंद हो गए। इनमें से दो छात्रों के उत्पादों को उस समय पेटेंट भी हासिल था। इसके बावजूद भी यह कामयाब नहीं हो पाए।
भाषा विवि में इंजीनियरिंग संकाय के पूर्व छात्र दीपक मौर्या ने बताया कि बीते सत्र में विवि में छात्रों के पास 12 आईडिया स्टार्टअप थे। इन सभी के पास न्यूनतम व्यवहार्य उत्पाद (एमवीपी) था, और इनका प्रोटोटाइप भी तैयार था। इसके बावजूद विवि ने उन्हें मदद नहीं उपलब्ध कराई, जिससे वह बाजार में अपना उत्पाद उतार पाने से चूक गए।
छात्र ने आरोप लगाया कि तत्कालीन कुलपति ने यह कहकर सहयोग करने से मना कर दिया था कि विश्वविद्यालय के पास फिजूल खर्च के लिए पैसे नहीं हैं। अगर छात्रों को अपने स्टार्टअप में निवेश के लिए निवेशकों को आकर्षित करना है, तो कार्यक्रम का खर्च छात्र खुद उठाए, जबकि उससे पूर्व विश्वविद्यालय ने उन्हें हरसंभव मदद का दावा किया था। छात्र ने बताया कि प्रायोजकों के माध्यम से एक बैंक भी उन्हें सहयोग करने को तैयार था।
प्रो. मसूद बने जन सूचना अधिकारी
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विवि में प्रो. मसूद आलम फलाही को जन सूचना अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। प्रभारी कुलपति प्रो. जेपी पांडेय के अनुमोदन के बाद कुलसचिव महेश कुमार ने इसका आदेश जारी कर दिया। प्रो. मसूद सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 से संबंधित सभी प्रकरणों को निस्तारित करेंगे। इससे विवि में इस विषय से जुड़ी हुई पत्रावलियों को निपटाने में तेजी आएगी।