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50 प्रतिशत कम किए जाएं सभी कक्षाओं के पाठ्यक्रम, भारतीय बालरोग अकादमी ने जारी की गाइडलाइन

Wed, 14 Oct 2020 05:19 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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कोरोना काल में स्कूल खोलने से पहले भारतीय बालरोग अकादमी ने प्रोटोकॉल के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए। सभी विषयों का 50 फीसदी सिलेबस कम करने का सुझाव दिया। विशेषज्ञों ने प्रदेशों में सर्वे किया। यूपी में इसकी जिम्मेदारी एसजीपीजीआई की डॉ. पियाली भट्टाचार्य और डॉ. उत्कर्ष बंसल ने संभाली।

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अध्ययन के बाद स्कूल खोलने पर गाइडलाइन जारी की। संक्रमण की दर पांच फीसदी से कम होने,  जिले में रोजाना प्रति लाख जनसंख्या पर नए मामलों की संख्या 20 से कम होने, स्कूलों को समयसारिणी बदलकर पालियों में बड़ी कक्षाएं खोलने, कक्षाओं को हवादार रखने, कम से कम एक मीटर की दूरी रखने को कहा।

विशेषज्ञों के सुझाव

- छात्रों को रटाने के बजाय गतिविधि आधारित शिक्षा पद्धति को बढ़ावा दिया जाए।
-  शिक्षकों और अभिभावकों के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण सत्र आयोजित करें। महामारी के दौरान बच्चों की मदद करें और मनोवैज्ञानिक समस्याओं वाले बच्चों की पहचान करें।
- अनौपचारिक शिक्षा से दैनिक जीवन में कौशल विकास को प्रोत्साहित किया जाए।
- छात्रों की उम्र के हिसाब से सह-पाठ्यक्रम कौशल प्रदान करने पर अधिक जोर दें।

टिफिन बॉक्स स्कूल नहीं ला सकेंगे छात्र

9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए 19 अक्तूबर से दोबारा खोले जा रहे हैं। हालांकि, बच्चें टिफिन बॉक्स लेकर नहीं आएंगे। लंच के दौरान छात्र एक-दूसरे के साथ बैठकर इसे शेयर कर सकते हैं, इसे देखते हुए यह फैसला लिया गया है। जिले के सभी वार्डों के स्कूलों के प्रतिनिधियों के साथ वर्चुअल बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक ने ये निर्देश दिए।

वहीं, स्कूलों के आस-पास खाने-पीने के ठेले लगाने पर भी पाबंदी रहेगी। इसे सुनिश्चित करना स्कूल की जिम्मेदारी होगी। सुबह आठ से शाम पांच बजे तक चली बैठक में डीआईओएस डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने स्कूल प्रतिनिधियों से कहा कि सभी शासन की ओर से जारी एसओपी का प्रिंटआउट निकाल कर उसकी कॉपी स्कूल परिसर में रखने के निर्देश दिए, ताकि जरूरत पड़ने पर इसका संज्ञान ले सकें।
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बैठक में स्कूलों को दिए निर्देश

- छात्रों को निजी वाहन से न आने दिया जाए, हो सके तो अभिभावक छोड़ें। 
- स्कूल खोले जाने को लेकर व छात्रों के आने पर दबाव ना हो। इसे उत्सव की तरह लें। हो सके तो परिसर में छात्रों से दीया जलवाकर सकारात्मक संदेश दें।
- सभी छात्र ऑनलाइन पढ़ाई से लाभान्वित नहीं होंगे। इन्हें चिह्नित कर उनकी बौद्धिक क्षमता अनुसार पढ़ाई कराई जाए।
- छात्रों को बताएं कि घर जाने के बाद कपड़े साबुन के पानी में भिगोकर रख देने हैं। फिर नहाने के बाद ही कमरे में जाएं।
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