लखनऊ। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में बुधवार को प्रमुख जन गोष्ठी में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का अलग ही रूप देखने को मिला। जुपिटर हॉल में उन्होंने 60 से अधिक प्रबुद्धजनों के 25 से अधिक प्रश्नों के जवाब देकर जिज्ञासाओं को शांत किया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्र को सर्वोपरि बताया। करीब ढाई घंटे चले कार्यक्रम में सबकुछ अनुशासित दिखा। बीच-बीच में वे बातों में हास्य का पुट जोड़ते तो पूरे हॉल में हंसी की लहर उठ जाती।
न्यायमूर्ति रंगनाथ राय और मंजुल त्रिवेदी के सामाजिक समरसता पर पूछे प्रश्न पर सरसंघचालक ने कहा कि समाज में एकता का आधार समरसता है। जाति व्यवस्था ही नहीं है, वह तो अव्यवस्था है। समय बदल चुका है, आज सभी लोग सभी काम कर रहे हैं। संघ में किसी की जाति नहीं पूछी जाती है। सब हिन्दू सहोदर हैं, इस भाव से काम करते हैं। समाज से जाति को मिटाने के लिए इसे भुलाना होगा। हिंदू धर्म ही सच्चा मानव धर्म है। प्रो. सिद्धार्थ सिंह के यूजीसी पर किए सवाल पर उन्होंने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट के पाले में है और वहीं से इसका मार्गदर्शन भी मिलेगा। निर्णय के बाद हम इस पर बात करेंगे।
भले अलग-अलग रहें लेकिन परिवार में हो सौहार्द
आईआईएम के डॉ. मनीष सिंह ने सवाल किया कि संयुक्त परिवार टूटते जा रहे हैं और एकल परिवारों का चलन बढ़ा है, इसके लिए संघ क्या प्रयास कर रहा है? इस पर भागवत ने कहा कि आज के दौर में 70 लोगों का एक ही घर में रहना संभव नहीं है। ऐसे में अलग-अलग भी रह रहे हैं तो परिवारों में एकता और सौहार्द जरूरी है। वे उत्सव, त्योहार व खुशियां साथ मनाने के लिए इकट्ठे हो सकते हैं। जेन-जी पर सवाल पर उन्होंने कहा कि आधुनिकीकरण का विरोध नहीं, पश्चिमीकरण का विरोध होना चाहिए। बच्चों का स्क्रीन टाइम हमें तय करना होगा। 12 साल तक बच्चा परिवार से ही सीखता है और फिर बाहर की दुनिया के प्रभाव में आकर जब ठोकर खाता है तो उसे समझाने के लिए परिवार को उपलब्ध रहना चाहिए।
टैरिफ वार को दिल पर न लीजिए
मुख्यमंत्री के सलाहकार व पूर्व आईएएस अवनीश अवस्थी के प्रश्न के जवाब में भागवत ने कहा कि टैरिफ वार को दिल पर न लीजिए। सामने वाला हमें दबाकर देख रहा है कि हम कितना दब सकते हैं, लेकिन उसे पता है कि हम दबेंगे नहीं। टैरिफ की जबरदस्ती करने वाले विश्वास खो रहे हैं, उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। देश को विकसित बनाने की ललक हर भारतीय में होनी चाहिए। डॉ. अरविंद माथुर के सवाल पर उन्होंने कहा कि पर्यावरण को लेकर हमें तीन बातों पर ध्यान देना होगा- पानी बचाओ, पेड़ लगाओ और प्लास्टिक हटाओ।
एआई युग में संस्कृति पर संकट नहीं
अरुण त्रिवेदी और हर्ष अग्रवाल के सवाल के जवाब में सरसंघचालक ने कहा कि एआई के युग में संस्कृति पर संकट नहीं है। किसी भी व्यक्ति को तकनीक नहीं उसके संस्कार तैयार करते हैं। टेक्नोलॉजी के मालिक बनिए, उसके गुलाम नहीं। एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि हम खुद को सुधारें तो नेता खुद सुधर जाएंगे। योगेश मिश्र और चंद्रभूषण सिंह के सवाल के जवाब में कहा कि कला सत्यम, शिवम, सुंदरम पर आधारित होनी चाहिए और यह समाज के लिए बेहद जरूरी है।
संघ में महिलाओं की भूमिका बहुत अहम
लखनऊ विवि की सेवानिवृत्त प्रोफेसर निशी पांडेय ने संघ में महिलाओं की कम संख्या पर प्रश्न किया तो उन्होंने कहा कि संघ के कार्यकताओं की प्रेरणा ही उनकी मां, पत्नियां और बहनें हैं। महिलाओं की शाखाएं अलग से चलती हैं, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं आती हैं। पूर्व आईएएस नवनीत सहगल के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र का युवा भी अब संघ से जुड़ रहा है और इसी के मद्देनजर शहरों में बड़ी संख्या में हिंदू सम्मेलनों का आयोजन हो रहा है।
इफ यू हैव अ थीम, वी हैव अ टीम
भागवत ने कहा कि संघ में शामिल हुए बिना आप यहां की कार्यप्रणाली और उद्देश्य को नहीं समझ सकते। संघ को लेकर पहले से कोई धारणा न बनाएं। हम तो उन्हें भी संघ का ही सदस्य मानते हैं जो किसी न किसी रूप में देश के विकास के लिए अपना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा- इफ यू हैव अ थीम, वी हैव अ टीम। इफ यू हैव अ टीम, वी हैव द थीम।
दिरा गांधी प्रतिष्ठान में प्रमुख जन गोष्ठी में बोलते आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत।