राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में कला संवाद के दौरान मौजूद लोग।
लखनऊ। संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली की ओर से भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के सहयोग से राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में कला संवाद का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने कहा कि भगवद्गीता और नाट्यशास्त्र भारतीय सांस्कृतिक चेतना के मूल स्तंभ हैं। ये दोनों जीवन-दर्शन और कला-दर्शन के मध्य सशक्त सेतु का कार्य करते हैं। संगीत नाटक अकादमी के सचिव राजू दास व अन्य वक्ताओं में विश्व भूषण, बिरजू महाराज कथक संस्थान की अध्यक्ष और कथक गुरु कुमकुम धर और प्रो. शैलेंद्र गोस्वामी ने भी विचार व्यक्त किए।
राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में कला संवाद के दौरान मौजूद लोग।
राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में कला संवाद के दौरान मौजूद लोग।
राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में कला संवाद के दौरान मौजूद लोग।
राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में कला संवाद के दौरान मौजूद लोग।
राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में कला संवाद के दौरान मौजूद लोग।
राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में कला संवाद के दौरान मौजूद लोग।
राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में कला संवाद के दौरान मौजूद लोग।
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