मात्र 50 पैसे के खर्च पर जहां धंधेबाज अपनी तिजोरी भरेंगे वहीं आम जनता की सेहत दांव पर लगेगी।
इस खेल में ब्लेंडेड इडिबिल वेजीटेबल आयल को मस्टर्ड व रिफाइंड बता कर बाजार में खपाया जाने लगा है। टिन पर चस्पा किए जाने वाले यह ब्रांडेड नेम वाले स्टीकर मात्र 40 से 50 पैसा के खर्च पर तैयार किए जाते हैं।
नामचीन ब्रांड की मिलती-जुलती पैकिंग व डिजाइन के सहारे मिलावटी तेल का धंधा किया जा रहा है। अमर उजाला ने जब इस खेल की तहकीकात की।
पता चला कि डालीगंज, त्रिवेणी नगर में हाथीबाबा मंदिर के समीप, मड़ियांव में बंद कोल्ड स्टोरेज के परिसर, ऐशबाग में भरतपुरी मलिन बस्ती व अंबेडकर नगर सहित राजधानी के करीब एक दर्जन स्थानों पर मिलावटी तेल का कारोबार चलता मिला।
शहर में बीते दिनों एफएसडीए टीम द्वारा संचालित जांच अभियान की जांच के दौरान खतरनाक रंगों की मिलावट की पुष्टि के बाद भी विभागीय अधिकारी इसकी रोकथाम को लेकर पूरी तरह से उदासीन हैं।
इसके चलते ही बीते तीन माह से शहर में नमूना सैपलिंग का काम पूरी तरह से बंद है।
इसी का फायदा उठा धंधेबाज होली में खाद्य तेलों की खपत को देखते हुए ब्रांडेड आइटमों के नाम से मिलते जुलते रैपर छपवा कर इन्हें मिलावटी सरसों तेल, वनस्पति घी व रिफाइंड आयल के टिन में लगाकर बाजार में खपा रहे हैं।
इस खेल में मिलावटखोरों को प्रति टिन करीब तीन से चार सौ रुपये का सीधा मुनाफा हो रहा है।
सेहत के लिए खतरनाक
गैस्ट्रो फिजीशियन व सर्जन डॉ. संजीब विश्वास कहते हैं कि घटिया खाद्य तेल में मिलायी जाने वाले अपमिश्रित सामग्री से केमिकल रिएक्शन का खतरा पैदा हो जाता है।
अधिक मुनाफा कमाने के लिए खाद्य तेल में मिलाए जाने वाले घुलनशील रंग वाले बटर आयल, हाइड्रोसायनिक अम्ल, सेंट व विदेशी पॉम आयल के शरीर में जाने से इसके धमनियों में जमने का अंदेशा रहता है।
इससे हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके साथ ही इस तरह के मिलावटी खाद्य तेल के सेवन से पेट संबंधी बीमारियों के साथ ही त्वचा रोग व लीवर खराब होने का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है।