लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय की ओर से शुक्रवार को परीक्षा की तिथियां घोषित करने के बाद शिक्षकों के विरोध के सुर उठने लगे हैं। विद्यार्थी पहले ही परीक्षा के विरोध में हैं। विवि से सहयुक्त कॉलेज शिक्षक संघ (लुआक्टा) ने परीक्षा स्थगित करने की मांग की है। ऐसा न होने पर मजबूरन उन्हें परीक्षा का बहिष्कार करना पड़ेगा। लुआक्टा अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय के अनुसार लखनऊ में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में परीक्षा कराने का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। लविवि और सहयुक्त कॉलेजों में डेढ़ लाख से ज्यादा विद्यार्थी हैं। एक साथ इतनी बड़ी परीक्षा कराना सामान्य दिनों में भी काफी चुनौतीपूर्ण होता है। लविवि द्वारा कोरोना संक्रमण के समय परीक्षा कराने का निर्णय काफी जल्दबाजी में लिया गया है। उनके अनुसार यह आदेश मुख्यत: बीएड प्रवेश परीक्षा आयोजन के लिए है। बीएड परीक्षा सिर्फ एक दिन ही होनी है। जबकि लविवि की परीक्षा महीने भर से ज्यादा चलेगी। इतने ज्यादा लोगों को इतने दिनों तक शारीरिक दूरी रखते हुए संभालना काफी मुश्किल काम है। अन्य जिलों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण होगी। इसके साथ ही सबसे बड़ा सवाल यह है कि वापस आने के दौरान कहीं उनमें से कोई कोरोना संक्रमित हो गया तब क्या स्थिति होगी। इसलिए सरकार को फिलहाल परीक्षा स्थगित रखते हुए स्थिति सामान्य होने का इंतजार करना चाहिए। समाजवादी छात्र सभा देगी धरना लखनऊ विवि द्वारा परीक्षा कराने के फैसले के विरोध में समाजवादी छात्र सभा भी उतर आई है। छात्रसभा के अध्यक्ष दिग्विजय देव ने सोमवार से इसके विरोध में धरना देने की बात कही है। छात्रसभा गांधी प्रतिमा पर धरना देगी। मुख्यमंत्री को लिखेंगे पत्र लखनऊ विवि द्वारा परीक्षा कराए जाने का निर्णय सही नहीं है। इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा जाएगा। मांग न मानी जाने पर परीक्षा के बहिष्कार के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं होगा। - डॉ. मनोज पांडेय, अध्यक्ष लुआक्टा शासन के निर्देश का होगा पालन लविवि ने शुरुआत से ही साफ कर दिया है कि शासन के निर्देश पर ही परीक्षा कराई जाएगी। विवि ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। शासन जैसा निर्देश देगा उसका पालन किया जाएगा। - डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव, प्रवक्ता लविवि