लखनऊ। होली से पहले बुधवार को बाजार पर समृद्धि का खूब रंग बरसा। पॉश से लेकर पारंपरिक बाजारों तक में आखिरी दौर में दुकानदार किसी तरह स्टॉक खत्म करने तो ग्राहक कम समय में मनपसंद खरीदारी की जद्दोजहद में नजर आए। बच्चों में इलेक्ट्रिक पिचकारी तो सेहत के फिक्रमंदों के लिए बेक्ड व ड्राईफ्रूट की गुझिया इस बार होली के खास आकर्षण रहे। कपड़ों में कुर्ता-पायजामा की मांग रही। होलिकादहन में इस्तेमाल होने वाली गेहूं की बालियां, उपले भी खूब बिके। करीब 50 लाख की आबादी वाले शहर लखनऊ में होली पर 500 करोड़ से ज्यादा के कारोबार का अनुमान है।
सीन एक : केसर, गुलाब की गुझिया और कुर्ता-पायजामा रहे खास आकर्षण
बुधवार को शहर के पॉश बाजारों हजरतगंज, गोमतीनगर, कपूरथला, आईटी चौराहे पर ब्रांडेड मिठाइयों व कपड़ों की बड़ी दुकानों पर खूब भीड़ देखने को मिली। शहरियों ने 1000-1500 रुपये तक की केसर, गुलाब, ठंडाई व बेक्ड गुझिया तो पहनने के लिए पारंपरिक कुर्ता-पायजामा जैसे परिधान को अहमियत दी। हजरतगंज और आईटी चौराहा स्थित मिठाई व बेकरी के संचालक अंकित व बादल साहनी ने बताया कि सबसे ज्यादा मांग पैकिंग आयटम की रही। होली के गिफ्ट के रूप में लोगों ने इसे खूब पसंद किया। हजरतगंज के ब्रांडेड शोरूम के संचालक अशरफ ने बताया कि 1500 से लेकर 5000 रुपये तक के कुर्ता पायजामा लोगों की पसंदीदा सूची में रहे।
पारंपरिक बाजारों में बस भीड़ ही भीड़
शहर के पारंपरिक बाजार चौक, अमीनाबाद, यहियागंज, निशातगंज,आलमबाग व चारबाग के बाजारों में भी इस कदर भीड़ रही कि लोगों ने धक्कामुक्की के माहौल में ही खरीदारी की। कचरी चिप्स, पापड़, खस्ता, मठरी और नमकीन की दुकानों का माहौल ऐसा था कि जैसे क्या पाएं, क्या खरीद लें। अमीनाबाद की एक दुकान पर सैकड़ों तरह के स्वाद के चिप्स व पापड़ के लिए ग्राहक काफी जद्दोजहद करते रहे। वाहनों के हॉर्न के बीच ठेले से लेकर पक्की दुकानों तक में हर तरफ बस मोलभाव करते ग्राहक ही नजर आए। यही हाल गड़बड़झाला में भी दिखा, जहां लोग डिजाइनर क्रॉकरी के बर्तन तलाशते रहे। चौक बाजार में भी 500-700 रुपये किलो तक मिलने वाली गुझिया और चिकन के कुर्ता-पायजामा की दुकानों पर अच्छी भीड़ देखी गई। निशातगंज में गेहूं की बालियां व गोबर के उपलों की अच्छी बिक्री हुई। दुबग्गा से आई रमा देवी ने बताया कि 10-10 रुपये में उपले और गेहूं की बालियों के बंडल बिक रहे थे। महानगर में लगने वाली बुध बाजार में तो इस कदर भीड़ उमड़ी कि लोगों को पैर संभाल-संभाल कर रखना पड़ा।