लखनऊ। केजीएमयू में जनरल सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रो. अभिनव अरुण सोनकर के अनुसार कैंसर का इलाज कर रहे डॉक्टरों को रेडियोडायग्नोसिस जांच में दक्ष होना चाहिए। इससे स्तन कैंसर का प्रसार रोका जा सकेगा। प्रो. सोनकर ब्रेस्ट इमेजिंग और इंटरवेंशन पर आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे।
उन्होंने बताया कि स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग मैमोग्राफी व अल्ट्रासाउंड से हो सकती है। डिजिटल मैमोग्राफी से स्तन कैंसर के पनपने से पहले ही उसकी पहचान कर ली जाती है। अगर सामान्य डॉक्टर मैमोग्राफी या अन्य रेडियोडाग्यनोसिस जांच करने में सक्षम हों और उसे पढ़ सकें तो शुरुआती अवस्था में ही स्तन कैंसर की पहचान हो जाएगी। इससे इलाज आसानी से संभव है।
प्रो. अभिनव ने कहा कि समस्या यह है कि मैमोग्राफी पढ़ने की दक्षता सभी डॉक्टरों में नहीं होती। इसे ध्यान में रखते हुए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। आयोजक डॉ. गीतिका नंदा सिंह ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य स्तन कैंसर के बारे में जागरूकता फैलाने के साथ संकाय, रेजिडेंट और छात्रों को ब्रेस्ट इमेजिंग और इंटरवेंशनल तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है। यह अपनी तरह की पहली कार्यशाला है जिसमें मैमोग्राम और यूएसजी ब्रेस्ट तकनीक व मूल्यांकन के बारे में बताया गया। इससे पहले कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मौके पर डॉ. निखिल सिंह, डॉ. नवनीत कौर और डॉ. अंजलि मिश्रा उपस्थित रहे।