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राहत भरी खबर: कोरोना से ढाल बन सकता है बीसीजी का टीका, WHO ने भी किया स्वीकार

Wed, 01 Apr 2020 01:56 PM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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कोरोना वायरस से निपटने के लिए विश्व स्तर पर मंथन का दौर चल रहा है। ऐसी स्थिति में यह बात सामने आई है कि जिन देशों में बैसिलस कैलमेट गुएरिन (बीसीजी) का टीकाकरण लंबे समय से चल रहा है, वहां कोरोना की चपेट में आने वालों की मृत्युदर कम है, लेकिन जहां बाद में टीकाकरण शुरू हुआ या जहां कुछ दिन बाद टीकाकरण बंद हो गया, वहां मृत्युदर अधिक है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसे स्वीकार किया है। भारत के लिए राहत की खबर बताई जा रही है, क्योंकि यहां वर्ष 1962 से लगातार बीसीजी टीकाकरण हो रहा है।

एक आस्ट्रेलियाई इंस्टीट्यूट कोरोना के खिलाफ बीसीजी का ट्रायल शुरू करने जा रहा है। इसे बेस स्टडी का नाम दिया गया है। करीब चार हजार लोगों पर यह शोध होगा।

टीबी से बचाता है बीसीजी

मेलबर्न के एक रिसर्च पेपर में इंस्टीट्यूट के इंफेक्शन डिजीज हेड निगल कॉर्टेज ने कहा है कि बीसीजी इम्यून सिस्टम को बूस्ट करता है और बैक्टीरिया व वायरस से लड़ने में मदद करता है।

इसके पीछे तर्क दिया गया है कि कम उम्र में बीसीजी लगने की वजह से यह इम्यून थेरेपी के साथ ही शरीर को संक्रमण से लड़ने के लिए एनर्जी देता है। डब्ल्यूएचओ ने भी माना है कि बीसीजी कोरोना की मानक क्षमता को कमजोर बनाता है।   
 
बैसिलस कैलमेट गुएरिन (बीसीजी) करीब सौ साल पुरानी वैक्सीन है। वर्ष 1948 में मद्रास और तमिलनाडु में बीसीजी वैक्सीन लैब स्थापित की गई थी। 1962 में राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के जरिये बीसीजी वैक्सीनेशन में शामिल हुआ।

इसके बाद से यह लगातार चल रहा है। इसे बच्चे के जन्म के छह हफ्ते के अंदर लगाया जाता है। यह टीबी के संक्रमण से बचाता है।
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यहां देखें- तुलनात्मक चार्ट

बीसीजी टीकाकरण को लेकर विभिन्न देशों का तुलनात्मक चार्ट 
जहां बीसीजी अनिवार्य नहीं                       जहां अनिवार्य है
  देश       मामले          मौत                  देश      मामले    मौत
इटली      1,05,792    12,448              भारत    1397     35
अमेरिका  176518        3131              जापान    1953    56
स्पेन       94,417         8269             ब्राजील    4715    168

भारत के लिए राहत भरी खबर 
बीसीजी इम्यून थेरेपी का काम करता है। मूल रूप से इसे टीबी के लिए लगाया जाता है, लेकिन विदेशों में किए गए अध्ययन में यह बात सामने आ रही है कि जहां यह टीकाकरण लंबे समय से चल रहा है, वहां कोरोना से मृत्युदर कम है। यह भारत के लिए संतोष की बात है, क्योंकि यहां नवजात को नियमित पहला टीका बीसीजी का ही लगता है। - प्रो. आरके गर्ग, रिसर्च डीन, केजीएमयू
 
ट्रायल का करना होगा इंतजार

अभी इस पर ट्रायल होने जा रहा है। बेस स्टडी के बाद भारत में भी ट्रायल होगा, तभी कुछ कहा जा सकेगा। कुुछ शोध में बीसीजी को इम्यूनिटी बूस्टर माना गया है। इसलिए इसे भारत के लिए संतोषजनक स्थिति कहा जा सकता है, लेकिन अभी कोरोना पर इसकी पूरी तरह से प्रतिरोधकता को लेकर कोई स्पष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है। - डॉ. दर्शन बजाज, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, केजीएमयू

 
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