लखनऊ। बीबीएयू और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ उज्बेकिस्तान एक साझा शोध परियोजना पर काम करेंगे। दोनों की टीमें विशिष्ट लाभकारी रोगाणुओं की मदद से जैविक कचरे से जैव उर्वरक और जैव कीटनाशकों को बनाकर, पौधों में रोगों को नियंत्रित करने वाली तकनीक विकसित करने का प्रयास करेंगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, नई दिल्ली की इस परियोजना में बीबीएयू के प्रो. नवीन अरोड़ा और उज्बेकिस्तान से प्रो. दिलफूजा एगाम्बेर्दिवा, परियोजना अन्वेषक हैं। साथ ही तनावग्रस्त (सूखा, नमक और अन्य अजैविक तनाव) स्थितियों में मिट्टी या लवण से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने वाली तकनीकी विकसित करने का प्रयास करेगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), नई दिल्ली की इस परियोजना में बीबीएयू के पर्यावरण विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ उज्बेकिस्तान की ओर से प्रो. दिलफूजा एगाम्बेर्दिवा, परियोजना अन्वेषक (पीआई) हैं।
प्रो. अरोड़ा ने बताया कि दोनों देशों के पीआई मिट्टी की उर्वरता बढाने के लिए जैविक खेती, बायोनिकुलेंट या बायोस्टिमुलेंट के उपयोग के बारे में भी लोगों को जागरूक करेंगे। इस परियोजना से न केवल भारत और उज्बेकिस्तान के बीच वैज्ञानिक संबंध विकसित होंगे बल्कि उज्बेकिस्तान और भारत में कम उपजाऊ और लवण युक्त खारी मिट्टी के सुधार के लिए होने वाले अनुसंधान द्वारा नए तरीके के जैव उर्वरक को विकसित करने के अवसर भी मिलेंगे। भविष्य में, ऐसे ही अनुसंधान और उन्नत शोध उपायों को मजबूत करने के लिए बीबीएयू और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ उज्बेकिस्तान के बीच साझा समझौता पर भी हस्ताक्षर करने की योजना है।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना के माध्यम से वैज्ञानिक विचारों और प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान होगा। जिससे दोनों देशों के बीच संबंधों को समृद्ध बनाने में भी मदद मिलेगी। इस परियोजना के तहत दोनों देशों के पीआई एक-दूसरे के देश में आ-जा सकेंगे और वहां की मिट्टी, पानी की गुणवता और सतत कृषि से जुड़े साझा मुद्दों का आकलन कर सकेंगे। परियोजना के माध्यम से, मिट्टी में होने वाली विभिन्न समस्याएं, जैसे कि मृदा उर्वरकता की कमी, मृदा में लवणों का जमा हो जाना और इन्ही कारणों से होने वाले फसल के उत्पादन में कमी आदि समस्याओं पर कार्य किया जाएगा तथा इन समस्याओं से निजात पाने के लिए तकनीक विकसित करने की दिशा में शोध कार्य किए जायेंगे। यह एक महत्वपूर्ण परियोजना है।